सीकर: सीकर के विश्वप्रसिद्ध खाटूश्यामजी में चल रहे फाल्गुनी लक्खी मेले के बीच परिवहन व्यवस्था का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। खाटू से जयपुर मार्ग पर चलने वाली करीब 70 प्राइवेट बसों ने अपना संचालन पूरी तरह बंद कर दिया है। बस ऑपरेटरों की हड़ताल के कारण पिछले दो दिनों में 60 हजार से ज्यादा श्रद्धालु बीच रास्ते में फंस गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि यात्री रोडवेज बसों की छतों पर लटककर जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
विवाद की मुख्य जड़ जयपुर शहर के अंदर बसों के प्रवेश को लेकर है। वर्तमान नियमों के अनुसार, प्राइवेट बसों को जयपुर के बाहर हीरापुरा बस स्टैंड पर ही सवारियां उतारनी पड़ती हैं। जबकि श्रद्धालु रेलवे स्टेशन या सिंधी कैंप (मुख्य बस स्टैंड) जाना चाहते हैं। हीरापुरा पर बस रोकने पर यात्रियों और बस ड्राइवरों के बीच आए दिन मारपीट और कहासुनी हो रही है, जिससे परेशान होकर ऑपरेटरों ने हड़ताल का रास्ता चुना है।
28 फरवरी तक का अल्टीमेटम
‘श्रीश्याम खाटू-जयपुर बस ऑपरेटर सेवा समिति’ ने मेला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपकर 23 से 28 फरवरी तक बिना जुर्माने सिंधी कैंप तक जाने की अनुमति मांगी है। यूनियन के अध्यक्ष मनीष बाजिया का कहना है कि यात्रियों के गुस्से का शिकार होने के कारण फिलहाल बसें चलाना संभव नहीं है।
विधानसभा में उठा मामला और सरकार का एक्शन
बुधवार को राजस्थान विधानसभा में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। इस पर डिप्टी सीएम और परिवहन मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कड़ा रुख अपनाते हुए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर को निर्देश दिए हैं कि श्याम भक्तों के लिए तुरंत अतिरिक्त बसों और मिनी बसों के इंतजाम किए जाएं। हालांकि, रोडवेज के दावों के बावजूद धरातल पर यात्रियों की भारी भीड़ के आगे मौजूदा इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
