जयपुर: राजस्थान के प्राइवेट स्कूलों में ‘राइट टू एजुकेशन’ (RTE) के तहत गरीब बच्चों को मिलने वाले फ्री एडमिशन में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने इस बार बड़ा कदम उठाया है। अब फर्जी आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) बनवाकर अपने बच्चों का एडमिशन कराने वाले पेरेंट्स पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नए नियमों के तहत न केवल एडमिशन रद्द होगा, बल्कि स्कूल की मूल फीस की दोगुनी राशि वसूली जाएगी और अभिभावक के खिलाफ FIR भी दर्ज होगी।
RTE एडमिशन 2026: महत्वपूर्ण तारीखें
- ऑनलाइन आवेदन शुरू: 20 फरवरी 2026
- आवेदन की अंतिम तिथि: 4 मार्च 2026
- लॉटरी निकलने की तारीख: 6 मार्च 2026
पहली बार PAN Card हुआ अनिवार्य
शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, आवेदन पत्र में पहली बार पैन कार्ड (PAN Card) की जानकारी मांगी गई है। शिक्षा विभाग की सहायक निदेशक और RTE एडमिशन प्रभारी चंद्र किरण पंवार ने बताया कि यदि पेरेंट्स के पास पैन कार्ड है, तो उन्हें उसका नंबर देना अनिवार्य होगा। इसी के आधार पर आय की जांच की जाएगी। हालांकि, जिनके पास पैन कार्ड नहीं है, उनके लिए इसे भरना जरूरी नहीं किया गया है, ताकि वास्तविक रूप से गरीब परिवार प्रभावित न हों।
संदेह होने पर स्कूल करेगा ITR की मांग
यदि किसी पेरेंट्स ने पैन कार्ड न होने की बात कही है, लेकिन स्कूल को उनकी आर्थिक स्थिति और रहन-सहन पर शक होता है, तो स्कूल इसकी शिकायत शिक्षा विभाग को करेगा। इसके बाद विभाग संबंधित अभिभावक से इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) जमा कराने को कहेगा। गड़बड़ी पाए जाने पर सीधी कानूनी कार्रवाई होगी।
कानूनी कार्रवाई (FIR) की जिम्मेदारी स्कूलों पर
नए आदेशों में एक पेंच यह भी है कि फर्जीवाड़े के मामले में FIR दर्ज कराने की सीधी जिम्मेदारी निजी स्कूलों पर ही डाली गई है। शिक्षा विभाग सीधे तौर पर मुकदमा दर्ज नहीं कराएगा। चूंकि अक्सर स्कूल संचालक कानूनी पचड़ों से बचते हैं, इसलिए इस नियम के जमीनी स्तर पर लागू होने को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं।
इस बार 4 कक्षाओं में मिलेगा एडमिशन
पिछले साल राजस्थान में RTE के तहत 3.39 लाख आवेदन आए थे, तब केवल नर्सरी और पहली (First) कक्षा में प्रवेश दिया गया था। लेकिन इस बार का दायरा बढ़ाते हुए नर्सरी, एलकेजी (LKG), यूकेजी (UKG) और पहली (1st)—इन चारों कक्षाओं में फ्री एडमिशन दिए जाएंगे।
ई-मित्र संचालकों को भी चेतावनी
अक्सर देखा गया है कि कुछ ई-मित्र संचालक गजेटेड अधिकारी की फर्जी मोहर और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर जाली आय प्रमाण पत्र बना देते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी ई-मित्र संचालक की मिलीभगत सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
