मुंबई। भारत की इनोवेशन यात्रा में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के प्रतिष्ठित गेटवे ऑफ इंडिया (Gateway of India) पर आयोजित एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त रूप से ‘India-France Year of Innovation 2026’ का औपचारिक शुभारंभ किया। अरब सागर के किनारे हुए इस ऐतिहासिक आयोजन ने न केवल दोनों देशों की तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत के बढ़ते नेतृत्व को भी रेखांकित किया।
तकनीकी साझेदारी से ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मिलेगी नई गति
इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच यह साझेदारी केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि भविष्य को गढ़ने वाली है। ‘ईयर ऑफ इनोवेशन’ का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेस टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में दोनों देशों की प्रतिभाओं को एक मंच देना है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजी में भारत-फ्रांस की यह जुगलबंदी ‘विकसित भारत’ के संकल्प को नई गति और दिशा प्रदान करेगी।
गेटवे ऑफ इंडिया पर भव्य नजारा, दुनिया ने देखी भारत की धमक
समारोह के दौरान गेटवे ऑफ इंडिया को विशेष रोशनी से सजाया गया था, जो भारत और फ्रांस के तिरंगे के रंगों में नहाया हुआ नजर आया। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारतीय स्टार्टअप्स और युवा इनोवेटर्स की ऊर्जा की सराहना करते हुए कहा कि फ्रांस भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 2026 का यह साल दोनों देशों के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा।
AI और साइबर सुरक्षा पर विशेष फोकस
इस पहल के तहत दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नैतिक उपयोग और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने पर मिलकर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित होगी। मुंबई में हुए इस आगाज ने यह साफ कर दिया है कि 21वीं सदी में भारत और फ्रांस दुनिया के लिए ‘इनोवेशन हब’ बनने की ओर अग्रसर हैं।
