“हिंदुत्व राजनीति नहीं, मानव कल्याण की परंपरा है”: सुनील आंबेकर ने ‘भारत बोध’ में रेखांकित की संघ की 100 वर्षों की यात्रा; सोशल मीडिया की अफवाहों पर दी चेतावनी

जयपुर के SMS स्टेडियम में 'भारत बोध' कार्यक्रम में आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा को राष्ट्र निर्माण में निर्णायक बताया। कार्यक्रम में 'भारतीय पर्यावरण चिंतन' पुस्तक का विमोचन हुआ और क्रीड़ा भारती ने मलखंभ के करतब दिखाए।

Ravindar Nagar

जयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर (Sunil Ambekar) ने रविवार को जयपुर में आयोजित ‘भारत बोध’ कार्यक्रम में संघ की शताब्दी यात्रा और भविष्य के भारत पर विस्तार से प्रकाश डाला। सवाई मानसिंह इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ की स्थापना का मूल उद्देश्य और बीते 100 वर्षों की यात्रा राष्ट्र निर्माण के लिए ही समर्पित रही है।

राष्ट्र निर्माण और संघ का इतिहास अपने संबोधन में सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से ही संघ की नींव रखी थी।

  • ऐतिहासिक भूमिका: उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता आंदोलन, देश का विभाजन, आपातकाल और अलगाववाद के दौर में संघ स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही है। डॉ. हेडगेवार स्वयं आजादी के आंदोलन में दो बार जेल गए थे।
  • शाखाओं का महत्व: आंबेकर ने कहा कि शाखाओं के माध्यम से अनुशासन, देशभक्ति और सेवा भाव का विकास किया गया, जिससे समाज में राष्ट्रीय चेतना का विस्तार हुआ।

“हिंदुत्व राजनीति नहीं, कल्याण की परंपरा है” संघ के विचारों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा:

“हिंदुत्व कोई राजनीतिक अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक और मानव कल्याण की परंपरा है। संघ राष्ट्र को राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक इकाई मानता है।”

उन्होंने कहा कि संघ में दायित्व पद की आकांक्षा के बजाय गुण, नीयत और कुशलता के आधार पर दिए जाते हैं। व्यक्ति निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव है और शाखाओं में खेल, गीत व प्रार्थना के जरिए सामान्य व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता विकसित की जाती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा: सेना के साथ नागरिक भी जिम्मेदार सुनील आंबेकर ने देश की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देश में विभाजन और भ्रम फैलाने वाली शक्तियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

  • सतर्कता की अपील: उन्होंने कहा कि देश की रक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि जागरूक नागरिक भी इसकी मजबूत कड़ी हैं।
  • सोशल मीडिया और फेक न्यूज: उन्होंने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और गलत सूचनाओं से सतर्क रहने, उन्हें आगे न बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आने वाले 20 वर्ष राष्ट्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत को सैन्य, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से इतना सशक्त बनाना होगा कि कोई देश हमारी ओर टेढ़ी नजर न उठा सके।


क्रीड़ा भारती के मलखंभ ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

कार्यक्रम का एक मुख्य आकर्षण क्रीड़ा भारती (Kreeda Bharati), जयपुर द्वारा आयोजित मलखंभ (Malkhamb) प्रदर्शन रहा।

  • पारंपरिक खेल मलखंभ में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया।
  • खिलाड़ियों ने लकड़ी के खंभे पर संतुलन, शक्ति और लचीलेपन का परिचय देते हुए हैरतअंगेज करतब, विभिन्न योगासन और कठिन मुद्राएं प्रस्तुत कीं, जिन्हें देखकर स्टेडियम में मौजूद दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

“भारतीय पर्यावरण चिंतन” पुस्तक का भव्य विमोचन

इस अवसर पर ज्ञान गंगा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण पुस्तक “भारतीय पर्यावरण चिंतन” का विमोचन सुनील आंबेकर के करकमलों से संपन्न हुआ। पुस्तक के संपादक बिरेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि इस ग्रंथ का उद्देश्य केवल पर्यावरणीय समस्याओं पर चर्चा करना नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा में निहित उस दृष्टि को सामने लाना है, जिसमें प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और संयमित उपभोग को जीवन का मूल माना गया है।

दिग्गज विचारकों के लेख शामिल इस पुस्तक में देश के प्रतिष्ठित विद्वानों और अनुभवियों के आलेख संकलित हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • अखिलेश मिश्र (आयरलैंड में भारत के राजदूत)
  • भूपेंद्र यादव (केंद्रीय मंत्री)
  • श्री श्री रविशंकर
  • स्वामी अवधेशानंद गिरी
  • प्रो. दयानंद भार्गव (वेद मनीषी)
  • प्रो. बजरंग लाल गुप्त
  • वैद्य राजेश कोटेचा (आयुष सचिव)
  • गोपाल आर्य (अखिल भारतीय पर्यावरण संयोजक)
  • प्रशांत पोल (प्रख्यात लेखक)

यह पुस्तक पर्यावरण को केवल संरक्षण या संकट के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन और जीवन-पद्धति के अभिन्न अंग के रूप में रेखांकित करती है।

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