दीनदयाल जी का दर्शन सनातन सत्य का परिष्कृत रूप: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने धानक्या स्मारक पर अर्पित की पुष्पांजलि

RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने जयपुर के धानक्या (Dhankya) स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक का दौरा किया। उन्होंने दीनदयाल जी के दर्शन को 'सनातन सत्य' बताया और उनकी राजनीतिक शुचिता को स्वतंत्र भारत का अद्वितीय उदाहरण कहा।

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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने धानक्या स्मारक पर अर्पित की पुष्पांजलि

जयपुर, राजस्थान: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को जयपुर के धानक्या गाँव स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक का दौरा किया। उन्होंने यहाँ पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके जीवन एवं कार्यों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन किया। डॉ. भागवत के इस दौरे ने दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन और राजनीतिक शुचिता के मूल्यों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने शुक्रवार को जयपुर के धानक्या गाँव स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्मारक का दौरा किया।

दर्शन की गहराई: कोरा चिंतन नहीं, सनातन अनुभव

डॉ. भागवत ने अपने संबोधन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन की गहराई पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि:

“पंडित दीनदयाल जी का जो दर्शन है, उसके पीछे उनकी पूरी जीवन की तपस्या है। वह कोरा चिंतन नहीं है, बल्कि जीवन के अनुभव की गहराई में हुए मनन का परिणाम है।”

भागवत ने स्पष्ट किया कि यह दर्शन कोई नया विचार नहीं है, बल्कि यह “अपना सनातन दर्शन ही है,” जिसे दीनदयाल जी ने देशकाल और परिस्थिति के अनुसार प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी ने ऋषि-मुनियों के विचारों को अनुभव किया और उसी अनुभव में से उसका एक परिष्कृत रूप समाज के सामने रखा।

राजनीति में अद्वितीय उदाहरण: चरित्र पर कोई बदलाव नहीं

सरसंघचालक ने पंडित दीनदयाल जी के राजनीतिक जीवन को स्वतंत्र भारत का एकमात्र उदाहरण बताया। उन्होंने कहा:

“दीनदयाल जी स्वतंत्र भारत में एकमात्र उदाहरण हैं जिन्होंने राजनीति में जाकर राजनीति की प्रकृति को बदलने का प्रयास किया, लेकिन राजनीति में रहकर भी अपने मूल चरित्र और स्वभाव में बिल्कुल बदलाव नहीं होने दिया।”

भागवत ने कहा कि दीनदयाल जी के रास्ते पर चलने वाले लोग प्रयास तो कर रहे हैं, लेकिन वह प्रयास किस दिशा में कैसे करें, इसका मूर्तिमान उदाहरण दीनदयाल जी ने स्वयं अपने जीवन से दिया है। डॉ. भागवत ने जोर दिया कि सत्य, करुणा, शुचिता और तपस्या—ये चारों बातें दीनदयाल जी के जीवन में पूर्णतः उत्कर्षता के साथ दिखती हैं।

राजस्थान कनेक्शन और समिति का लक्ष्य

पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति के अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा ने बताया कि समिति की स्थापना वर्ष 2019 में दीनदयाल उपाध्याय के विचार–दर्शन को देश-विदेश में फैलाने के उद्देश्य से की गई थी।

  • व्यक्तिगत प्रभाव: प्रो. छीपा ने बताया कि दीनदयाल जी के प्रचारक बनने से पूर्व जीवन के 21 वर्ष राजस्थान तथा 5 वर्ष उत्तर प्रदेश में बीते, जिसका उनके व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव पड़ा।
  • आध्यात्मिक नींव: बचपन में धानक्या स्थित शिव और हनुमान मंदिरों में दीनदयाल जी की दैनिक पूजा-अर्चना करने से उनमें आध्यात्मिक संस्कार आए, जिसका उनके विचार दर्शन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

समिति का लक्ष्य सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं में दीनदयाल भाव जागृत करना है। डॉ. भागवत ने भी सलाह दी कि दीनदयाल जी के आदर्शों का प्रचार सर्वत्र हो और उनके जीवन के अनुसार जीने वाले लोगों को प्रति वर्ष यहाँ सम्मानित भी किया जाना चाहिए।

सम्मान समारोह और गणमान्य उपस्थिति

सरसंघचालक के आगमन पर समिति के अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा, सचिव प्रतापभानू सिंह शेखावत, उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह शेखावत, कोषाध्यक्ष गजेन्द्र ज्ञानपुरिया व सह सचिव नीरज कुमावत ने उनका साफा, शाल, श्रीफल और पुस्तकों से सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल का भी सम्मान किया गया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल का भी सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम, जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल, चित्तौड़ प्रांत प्रचारक मुरलीधर, जोधपुर प्रांत प्रचारक विजयानंद, अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन, और राजस्थान धरोहर संरक्षण समिति के अध्यक्ष समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। सरसंघचालक जी ने समिति के सदस्यों से अनौपचारिक चर्चा भी की।

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