राजस्थान में इस साल होली और धुलंडी की तारीखों को लेकर चल रहा सस्पेंस अब पूरी तरह से खत्म हो गया है। जयपुर सहित पूरे प्रदेश में रंगोत्सव का यह महापर्व 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा। शहर के आराध्य गोविंददेव जी मंदिर में भी होली 2 मार्च को ही मनाई जाएगी। भद्रा काल के साए के कारण पूरे तीन साल बाद होलिका दहन के समय में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसके चलते प्रदेशभर में 2 मार्च की मध्यरात्रि को होलिका दहन किया जाएगा और इसके अगले दिन 3 मार्च को रंगों का त्योहार धुलंडी हर्षोल्लास के साथ मनेगा।
सिटी पैलेस में मध्यरात्रि को होगा होलिका दहन
जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से सिटी पैलेस में भी होलिका दहन 2 मार्च की मध्यरात्रि में ही संपन्न होगा। जयपुर की यह पुरानी परंपरा रही है कि सबसे पहले सिटी पैलेस में होलिका दहन किया जाता है और उसके बाद ही चारदीवारी सहित पूरे शहरभर में होली की अग्नि प्रज्ज्वलित की जाती है जिसे ‘होली मंगलना’ कहा जाता है। राजस्थान में होलिका दहन के बाद जो अगला सूर्योदय होता है, उसी दिन धुलंडी मनाने की सदियों पुरानी परंपरा है, इसलिए प्रदेश में 3 मार्च को ही एक-दूसरे को रंग लगाकर यह पर्व मनाया जाएगा।
भद्रा के कारण मध्यरात्रि का श्रेष्ठ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा के अनुसार 2 मार्च को शाम 5:56 बजे से पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो रहा है, और इसी के साथ अगले दिन सुबह 5:32 बजे तक भद्रा काल भी रहेगा। गोधूलि बेला में भद्रा होने के कारण, शास्त्र सम्मत ‘भद्रा पुच्छ काल’ में होलिका दहन करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इस कारण 2 मार्च को रात 1:26 बजे से 2:38 बजे के बीच होलिका दहन का सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा। केपी ज्योतिषाचार्य पं. मोहनलाल शर्मा के मुताबिक, भद्रा को शनिदेव की बहन माना जाता है और इनका स्वभाव बेहद उग्र होता है। भद्रा काल को क्रोध और विघ्न का समय माना गया है, इसलिए इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिए।
अन्य राज्यों में 3 और 4 मार्च को मनेगा पर्व
होलिका दहन मध्यरात्रि के बाद होने के कारण देश के कई अन्य राज्यों में त्योहार की तारीखों में भिन्नता देखने को मिल रही है। भद्रा को पूरी तरह टालने के उद्देश्य से बिहार, झारखंड, असम, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होलिका दहन 3 मार्च को और धुलंडी 4 मार्च को घोषित की गई है। हालांकि, राजस्थान में पंचांग और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार 2 और 3 मार्च को ही यह पावन पर्व पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
