राजस्थान में होली की तारीख पर उलझन: 3 या 4 मार्च, कब मनेगी धुलंडी? जानें भद्रा और चंद्रग्रहण का पूरा गणित और बचाव के तरीके

राजस्थान सहित पूरे देश में इस वर्ष होली के त्यौहार पर तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे लोग असमंजस में हैं। तीन साल के अंतराल के बाद इस बार सोमवार को होली पर भद्रा का साया रहेगा, जिसके कारण होलिका दहन परंपरा के अनुसार गोधूली वेला में न होकर 2 मार्च की मध्यरात्रि के बाद संपन्न होगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5:56 बजे से शुरू होकर अगले दिन 3 मार्च शाम 5:08 बजे तक रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार, भद्रा समाप्त होने के बाद अर्द्धरात्रि में ही होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत है, इसलिए दहन का शुभ समय रात 1:26 बजे से 2:38 बजे तक निर्धारित किया गया है।

धुलंडी पर साल का पहला चंद्रग्रहण, राजस्थान में दिखेगा असर

इस बार धुलंडी के पर्व पर साल का पहला चंद्रग्रहण भी लगने जा रहा है, जो भारत में दिखाई देगा। पंडित तपेश अवस्थी के अनुसार, यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:48 बजे समाप्त होगा और इसका सूतक काल सुबह 6:20 बजे से ही प्रभावी हो जाएगा। हालांकि, विद्वानों का मत है कि यह ग्रहण धार्मिक उत्सवों में बाधा नहीं डालेगा क्योंकि इसकी अवधि महज 18 मिनट की होगी और यह उल्लास को प्रभावित नहीं करेगा। इसके बावजूद, ग्रहण की उपस्थिति ने धुलंडी की तारीख को दो हिस्सों में बांट दिया है, जिससे कुछ लोग 3 मार्च को तो कुछ 4 मार्च को होली खेलेंगे।

आम सहमति की ओर झुकाव: जयपुर और अलवर में 4 मार्च को मनेगी होली

तारीखों के इस फेरबदल के बीच राजस्थान के कई शहरों में स्थानीय लोगों ने आपसी सहमति से 4 मार्च को ही रंग खेलने का निर्णय लिया है। अलवर और जयपुर के निवासियों का मानना है कि ग्रहण के दिन होली खेलना शुभ नहीं होता, इसलिए अधिकांश कॉलोनियों में एकमत होकर 4 मार्च को ही रंगोत्सव मनाने का फैसला किया गया है। हेमेंद्र शर्मा और राम प्रकाश व्यास जैसे स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट किया कि भले ही ज्योतिषीय दृष्टि से कुछ दोष न हो, लेकिन सामाजिक परंपरा और शुभता को देखते हुए अगले दिन होली मनाना अधिक बेहतर समझा जा रहा है।

रंगों से सुरक्षा: विशेषज्ञों ने दी त्वचा और बालों के बचाव की सलाह

होली के हुड़दंग के बीच स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी अनिवार्य है, क्योंकि रंगों में मौजूद हानिकारक केमिकल त्वचा और बालों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. नैन्सी गर्ग ने सुझाव दिया है कि होली खेलने से कम से कम 30 मिनट पहले पूरे शरीर और बालों में नारियल, जैतून या सरसों का तेल लगाना चाहिए ताकि रंग रोम छिद्रों में न समाएं। इसके अलावा, होंठ, कान और नाखूनों पर पेट्रोलियम जेली का प्रयोग और फुल स्लीव के कपड़े पहनना सुरक्षा की दृष्टि से फायदेमंद रहता है। उन्होंने सिल्वर, काले और गहरे लाल जैसे पक्के रंगों से बचने और होली के बाद हल्के गुनगुने पानी से त्वचा को बिना रगड़े साफ करने की सलाह दी है।

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