Jaisalmer Chadar Mahotsav: स्वर्ण नगरी में 6 मार्च से ‘चादर महोत्सव’ का शंखनाद; RSS प्रमुख मोहन भागवत करेंगे शुभारंभ

871 वर्षों बाद पवित्र चादर का होगा विधिवत अभिषेक; विश्वभर में 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु करेंगे 'दादागुरु इकतीसा पाठ', विशेष सिक्का एवं डाक टिकट का होगा विमोचन

जैसलमेर | राजस्थान के जैसलमेर में 6 से 8 मार्च 2026 तक तीन दिवसीय चादर महोत्सव और ‘दादागुरु इकतीसा पाठ’ का भव्य आयोजन होने जा रहा। इस ऐतिहासिक तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत करेंगे। इस अवसर पर आयोजित विशाल धर्मसभा को भी वे संबोधित करेंगे।

विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं का संगम

इस विराट कार्यक्रम का आयोजन ‘दादा गुरूदेव श्री जिनदत्तसुरि चादर महोत्सव समिति’ के तत्वावधान में हो रहा। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान, विद्या भारती तथा अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधि सहभागी बनेंगे। यह पूरा कार्यक्रम गच्छाधिपति आचार्य श्री मणिप्रभ सूरी जी की पावन निश्रा में सम्पन्न होगा। इस विराट महोत्सव के प्रेरणास्रोत पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञ सागर जी रहे। चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा तथा संयोजक जीतो के पूर्व चेयरमैन तेजराज गोलेछा बने। आयोजन में विभिन्न भारतीय परंपराओं के करीब 400 संतों और 20 हजार श्रद्धालुओं की मौजूदगी रहेगी।

1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं का ऐतिहासिक महासंकल्प

1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं का ऐतिहासिक महासंकल्प

दादागुरु इकतीसा कार्यक्रम के राष्ट्रीय चेयरमैन प्रकाश चंद्र लोढ़ा और राष्ट्रीय संयोजक ज्योति कोठारी ने बताया कि महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण 7 मार्च को देखने को मिलेगा। इस दिन विश्वभर में एक साथ 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालु सामूहिक ‘दादागुरु इकतीसा पाठ’ का ऐतिहासिक महासंकल्प लेंगे। निर्धारित समय पर देश-विदेश के श्रद्धालु अपने-अपने स्थानों से एक साथ पाठ करेंगे, जिससे विश्वभर में आध्यात्मिक चेतना की सामूहिक तरंग उत्पन्न होगी। विश्व हिंदू परिषद के संपूर्ण भारत के करीब 30 हजार मिलन एवं सत्संग केंद्रों, देशभर की सभी दादाबाड़ियों, विद्याभारती राजस्थान के 1000 स्कूलों और अनेक जैन-हिंदू मंदिरों में दादागुरू इकतीसा का सामूहिक पाठ संपन्न होगा।

871 वर्षों बाद पहली बार विधिवत अभिषेक

चादर महोत्सव समिति के चेयरमैन मंगल प्रभात लोढ़ा के अनुसार, यह अभियान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर आस्था, एकता और आध्यात्मिक जागरण का महाअभियान बनेगा। दादा गुरूदेव श्री जिनदत्तसुरि चादर महोत्सव में 871 वर्षों बाद पहली बार पवित्र चादर का विधिवत अभिषेक होगा। इससे पहले जैसलमेर किले से भव्य वरघोड़े के साथ चादर को महोत्सव स्थल तक लाया जाएगा।

तीन दिवसीय महोत्सव के प्रमुख आयोजन: आयोजन समिति के सचिव पदम टाटिया ने विस्तृत कार्यक्रम साझा किया-

  • 6 मार्च (पहला दिन): गच्छाधिपतिश्री, आचार्य, उपाध्याय सहित भगवंतों के मंगल प्रवेश से महोत्सव की शुरूआत होगी। इसके बाद आयोजित धर्मसभा में RSS प्रमुख मोहन भागवत मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर चादर समारोह का विशेष सिक्का और डाक टिकट विमोचित होगा। शाम को पहली बार दादा गुरूदेव के जीवन पर आधारित जीवंत नाटिका का मंचन किया जाएगा।
  • 7 मार्च (दूसरा दिन): जैसलमेर किले से चादर वरघोड़ा निकलेगा। 1 करोड़ 8 लाख श्रद्धालुओं द्वारा विश्वभर में सामूहिक दादा गुरू इकतीसा पाठ संपन्न होगा। दोपहर में चादर अभिषेक और पूजा होगी। सांस्कृतिक संध्या में प्रख्यात संगीतकार भक्ति महोत्सव में अपनी प्रस्तुति देंगे। पूज्य उपाध्याय मनितप्रभ सागरजी लिखित पुस्तक ‘द यूनिवर्सल ट्रूथ’ और डॉ. विद्युत्प्रभा श्रीजी की पुस्तक ‘गुरुदेव’ का विमोचन होगा।
  • 8 मार्च (तीसरा दिन): अखिल भारतीय श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ महासंघ और अखिल भारतीय खरतरगच्छ प्रतिनिधि महासभा के तत्वावधान में विशिष्ट कार्यक्रम का आयोजन होगा। उपाध्याय महेन्द्रसागर महाराज को आचार्य पद और गणिनी पद प्रदान किया जाएगा। इसी दिन चादर अभिषेक जल और वासक्षेप का वितरण होगा।

श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र पवित्र चादर

जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली के अनुसार, प्रथम दादागुरु आचार्य श्री जिनदत्त सूरी 11वीं शताब्दी के महान आध्यात्मिक आचार्य माने जाते। परंपरा के अनुसार अजमेर में राजा अर्णोराज द्वारा प्रदत्त भूमि पर उनका अग्नि-संस्कार हुआ। अग्नि-संस्कार के समय चादर का नहीं जलना एक अलौकिक घटना के रूप में प्रतिष्ठित हुआ, जो आज भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना। ऐतिहासिक उल्लेख के अनुसार लगभग डेढ़ शताब्दी पूर्व जैसलमेर के महारावल ने महामारी शमन हेतु अनहिलपुर पाटन से यह चादर मंगवाई थी। वर्तमान में यह चादर जैसलमेर दुर्ग स्थित श्री जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार में सुरक्षित रखी गई।

दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी

कार्यक्रम के दौरान 7 और 8 मार्च 2026 को “भारत की सांस्कृतिक एकात्मता, सामाजिक सद्भाव एवं समरसता में दादागुरु परंपरा का योगदान” विषय पर राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी आयोजित होगी। इसमें जोधपुर विश्वविद्यालय, राजस्थान विश्वविद्यालय, प्राकृत भारती संस्थान तथा समाज एवं संस्कृति अध्ययन केंद्र सहित कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान नॉलेज पार्टनर के रूप में सहभागी बनेंगे। यहाँ विभिन्न आचार्यों, जैन साधु-साध्वियों और विषय विशेषज्ञों की मौजूदगी रहेगी।

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