जयपुर राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने पश्चिमी राजस्थान की ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। शुक्रवार को राजस्व विषयों पर चर्चा के दौरान भाटी ने कहा कि यदि सीमांत क्षेत्र के लोगों की मांगों को अनसुना किया गया, तो वे जयपुर की सड़कों को जाम करने से पीछे नहीं हटेंगे।
पश्चिमी राजस्थान: सबसे बड़ा लैंड बैंक और सबसे बड़ा संघर्ष
विधायक भाटी ने सदन में अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि आज बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और फलौदी क्षेत्रों में राजस्थान का सबसे बड़ा ‘लैंड बैंक’ मौजूद है। विडंबना यह है कि जिस ओरण और गोचर भूमि को हमारे पूर्वजों ने पिछले 700-800 वर्षों से सहेज कर रखा, आज उसी के अस्तित्व को बचाने के लिए स्थानीय लोगों को अपनी ही सरकार के सामने संघर्ष करना पड़ रहा है।
आंकड़ों में ओरण की महत्ता
भाटी ने सदन के पटल पर ओरण भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े रखे:
- कुल संख्या: राजस्थान में लगभग 25,000 ओरण हैं।
- क्षेत्रफल: इन ओरणों का कुल क्षेत्रफल करीब 6 लाख हेक्टेयर है।
- मारवाड़ का डेटा: मारवाड़ क्षेत्र के 9053 गांवों में 3017 ओरण स्थित हैं, जिनमें अकेले जैसलमेर में ही 100 प्रमुख ओरण हैं।
- जीवनरेखा: उन्होंने स्पष्ट किया कि ये ओरण केवल जमीन के टुकड़े नहीं, बल्कि स्थानीय जल स्रोतों, तालाबों और पशुधन के लिए चरागाह की जीवनरेखा हैं।
सरकार से सवाल: भूमि आवंटन के लिए समग्र नीति क्यों नहीं?
सभापति के पीछे लगी महात्मा गांधी की तस्वीर की ओर संकेत करते हुए भाटी ने अहिंसा और संरक्षण के सिद्धांतों की याद दिलाई। उन्होंने सरकार से प्रश्न किया कि जब आबकारी जैसे हर विभाग की अपनी स्पष्ट नीति है, तो भूमि आवंटन के लिए एक समग्र नीति क्यों नहीं बनाई जा रही है?
बड़ी कंपनियों को चेतावनी
शिव विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि वे सौर ऊर्जा और अन्य परियोजनाओं के लिए आने वाली बड़ी कंपनियों के आगे घुटने न टेकें। उन्होंने कहा, “मजबूती से निर्णय लीजिए, हम आपके साथ हैं। लेकिन यदि सीमांत क्षेत्र के लोगों के हितों के साथ खिलवाड़ हुआ, तो राजधानी जयपुर की सड़कें जाम हो जाएंगी।”
