राजसमंद: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम ने कहा है कि महाराणा प्रताप केवल एक क्षेत्र या जाति की पहचान नहीं, बल्कि वे समूचे राष्ट्र की विरासत हैं। महापुरुषों को कभी सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता।
निम्बाराम शनिवार को राजसमंद जिले के रेलमगरा क्षेत्र स्थित गिलुंड कस्बे (Gilund) के प्रताप सर्कल पर महाराणा प्रताप की भव्य मूर्ति के अनावरण समारोह को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।
“सच्ची श्रद्धांजलि: उनके आदर्शों को जीवन में उतारें” निम्बाराम ने अपने संबोधन में कहा:
“महाराणा प्रताप के आदर्श और जीवन मूल्य हमारे व्यक्तित्व का अंग बनें, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। महापुरुष किसी स्थान और जाति की सीमा में बंधे नहीं होते, अपितु वे राष्ट्र के नायक होते हैं।”
इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में पढ़ने की जरूरत इतिहास के पुनर्लेखन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि आज हमें मेवाड़ का वास्तविक इतिहास पढ़ने और निडर होकर हल्दीघाटी के सच व प्रताप की विजय गाथा को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने गिलुंड क्षेत्र के ‘सर्व हिन्दू समाज’ की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह नवोदित पीढ़ी को अपने महान इतिहास से अवगत कराएगी।
विश्वराज सिंह मेवाड़: “प्रताप का जीवन संघर्ष की जीवंत कहानी” कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन हम सबके लिए प्रेरणादायक है। यह स्वाभिमान और संघर्ष की एक जीवंत कहानी है।
विशिष्ट अतिथि राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी और संत ज्ञानानंद ने भी सभा को संबोधित किया और प्रताप के त्याग को याद किया। मंच पर संत रामदास तथा अनुजदास का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

50 फीट ऊंचे भगवा ध्वज और जयकारों से गूंजा आकाश कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के साथ हुआ। इसके बाद अतिथियों ने महाराणा प्रताप की मूर्ति का अनावरण किया। साथ ही, पास में ही 50 फीट ऊंचे पोल पर भारतीय संस्कृति के प्रतीक भव्य भगवा ध्वज को स्थापित किया गया।
इस दौरान पूरा नगर गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा:
- “जय शिवा सरदार की, जय राणा प्रताप की”
- “जय एकलिंग नाथ की जय”
इन उद्घोषों ने पूरे वातावरण को देशभक्ति और उत्साह से सराबोर कर दिया।
सहभोज के साथ सामाजिक समरसता का संदेश कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को महाराणा प्रताप का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन का समापन सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाले ‘सहभोज’ (Community Feast) के साथ हुआ, जिसमें समाज के सभी वर्गों ने एक साथ भोजन किया।
