मातृ शक्ति की सेवा में राजस्थान का देशभर में डंका: ‘मातृ वंदना योजना’ में फिर नंबर-1 बना प्रदेश, कर्नाटक और यूपी को पछाड़ा; बेटी के जन्म पर मिल रहे 6000 रुपए

जयपुर। महिला सशक्तिकरण और मातृ शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में राजस्थान ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बादशाहत साबित की है। गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण एवं आर्थिक सहायता देने वाली केंद्र सरकार की फ्लैगशिप स्कीम ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ (PMMVY) के क्रियान्वयन में राजस्थान ने पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। केंद्र द्वारा जारी जनवरी 2026 की मासिक रैंकिंग में प्रदेश ने यह गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

इस उपलब्धि पर उपमुख्यमंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी ने खुशी जाहिर करते हुए विभागीय अधिकारियों की पीठ थपथपाई है। उन्होंने कहा कि आईसीडीएस (ICDS) राजस्थान की टीम ने बेहतरीन काम किया है। इससे पहले सितंबर 2025 की रैंकिंग में भी राजस्थान टॉप पर रहा था। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मार्गदर्शन में विभाग लगातार कीर्तिमान रच रहा है, जिसमें पिछले साल ‘पोषण पखवाड़ा’ में पहला और ‘पोषण माह’ में दूसरा स्थान मिलना शामिल है।

आईसीडीएस निदेशक वासुदेव मालावत ने बताया कि इस मासिक रैंकिंग में राजस्थान ने बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। रैंकिंग में राजस्थान पहले नंबर पर है, जबकि कर्नाटक दूसरे और असम तीसरे स्थान पर रहा है। वहीं, महाराष्ट्र को चौथा और उत्तर प्रदेश को पांचवां स्थान मिला है।

क्या है योजना और कितना मिलता है पैसा?

आमजन के लिए यह जानना जरूरी है कि इस योजना का लाभ कैसे मिलता है। योजना के तहत:

  1. पहला बच्चा: पात्र महिला को पहले बच्चे के जन्म पर दो किस्तों में कुल 5,000 रुपये (3000+2000) दिए जाते हैं।
  2. दूसरा बच्चा (बेटी): यदि दूसरे बच्चे के रूप में लड़की जन्म लेती है, तो महिला को एकमुश्त 6,000 रुपये की सहायता राशि मिलती है। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2022 के बाद जन्मी बेटियों के लिए लागू है।

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