सौर शक्ति से सशक्त राजस्थान-आत्मनिर्भर राजस्थान: सीएम भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी फैसलों से ‘सोलर हब’ के रूप में उभरा प्रदेश, कोयले पर घटी निर्भरता

जयपुर। नववर्ष का सूरज प्रदेश के लिए नई उम्मीदों की किरणें लेकर आया है। अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम के प्रचण्ड प्रकोप के लिए जाना जाने वाला राजस्थान अब उसी सूरज की तपिश को अपनी ताकत बनाकर विकास के रथ पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश के आमजन के घर ‘सूर्यघर’ बन रहे हैं और सौर ऊर्जा से खेतों में फसलें लहलहा रही हैं। बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता के साथ राजस्थान देश में ‘नम्बर वन’ राज्य बनने की दिशा में नए साल में प्रवेश कर रहा है।

1. ऊर्जा संकट से ऊर्जा सरप्लस की ओर बढ़ता कदम

ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब राजस्थान को कोयले की किल्लत के कारण बार-बार बिजली संकट का सामना करना पड़ता था। लेकिन, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साल में लगभग 320 दिन मिलने वाले प्रचुर सूर्य के प्रकाश को प्रदेश का ऊर्जा परिदृश्य बदलने का जरिया बनाया। उनके नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए तेजी से नीतिगत निर्णय लिए गए। निवेश में आने वाली बाधाओं को दूर किया गया और भूमि आवंटन की प्रक्रियाओं को बेहद सुगम बनाया गया। इन त्वरित फैसलों का नतीजा यह हुआ कि सौर ऊर्जा परियोजनाएं समय पर पूरी होने लगीं। यही कारण है कि महज दो साल में ही प्रदेश की सौर ऊर्जा क्षमता बढ़कर दोगुनी हो चुकी है और राजस्थान ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

2. दो साल में रिकॉर्ड वृद्धि: 18 हजार मेगावाट बढ़ी स्थापित क्षमता

राजस्थान अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए देश का सबसे उपयुक्त राज्य माना जाता है। वर्तमान के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं:

  • कुल क्षमता: प्रदेश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 35 हजार 910 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।
  • राष्ट्रीय भागीदारी: यह क्षमता देश की कुल सौर क्षमता का लगभग 27 प्रतिशत है।
  • रिकॉर्ड बढ़ोतरी: बीते दो वर्षों में राज्य की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में 18 हजार मेगावाट से अधिक की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
  • भूमि आधारित योगदान: भूमि पर लगी देश की कुल 1 लाख मेगावाट स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में से 31 हजार मेगावाट का बड़ा योगदान अकेले राजस्थान का है। इस अभूतपूर्व प्रगति से राजस्थान देश के ‘सोलर हब’ के रूप में अपनी वैश्विक पहचान बना रहा है।

3. पीएम कुसुम योजना: विकेन्द्रीकृत सौर ऊर्जा में राजस्थान की धाक

विकेन्द्रीकृत (Decentralized) सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘पीएम कुसुम योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया। इसका सुखद परिणाम यह हुआ कि पीएम कुसुम में स्थापित ऊर्जा क्षमता पिछले दो साल में 122 मेगावाट से बढ़कर 2629 मेगावाट हो गई है।

  • गाँव-ढाणी में बिजली: कुसुम योजना के कम्पोनेंट-ए एवं कम्पोनेंट-सी के अन्तर्गत प्रदेश की गांव-ढाणियों में 2 हजार 629 मेगावाट क्षमता से अधिक की 1 हजार 201 ग्रिड कनेक्टेड लघु सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं।
  • कम्पोनेंट-ए (Component-A): इसके अंतर्गत 478 मेगावाट क्षमता के 368 प्लांट स्थापित किए गए हैं। इस श्रेणी में राजस्थान पूरे देश में प्रथम स्थान पर है।
  • कम्पोनेंट-सी (Component-C): इसमें 2 हजार 151 मेगावाट क्षमता के 833 प्लांट स्थापित किए गए हैं, जिससे राजस्थान देश में तीसरे स्थान पर है।

4. किसानों को दिन में बिजली: 2.83 लाख अन्नदाताओं को मिला लाभ

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के किसानों को वर्ष 2027 तक दिन में खेती के लिए बिजली देने का वादा किया था, जिसे तेजी से पूरा किया जा रहा है। आज राजस्थान के 22 जिलों के किसानों को दिन में बिजली मिलने लगी है, जिसमें सौर ऊर्जा का बड़ा योगदान है।

  • लाभार्थी: पीएम कुसुम योजना के सभी कम्पोनेंट्स से अब तक 2 लाख 83 हजार से अधिक किसानों को खेती के लिए दिन में बिजली की सुविधा मिल रही है।
  • सोलर पम्प: बीते दो साल में पीएम कुसुम कम्पोनेंट-बी के तहत 58 हजार 361 सोलर पम्पसैट की स्थापना की गई है। सस्ती सौर ऊर्जा मिलने से किसानों की महंगे डीजल पंपों पर निर्भरता कम हुई है और उनकी लागत घटी है।

5. पीएम सूर्यघर योजना: छत पर बन रही बिजली, बढ़ रही आमदनी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की हर घर को ऊर्जादाता बनाने की पहल पर शुरू की गई ‘पीएम सूर्यघर योजना’ में भी राजस्थान देश में 5वें स्थान पर है। आमजन अपनी छतों (रूफटॉप) पर सोलर पैनल लगाकर न केवल मुफ्त बिजली प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आर्थिक लाभ भी कमा रहे हैं।

  • प्रगति: प्रदेश में पीएम सूर्यघर योजना के तहत 481 मेगावाट क्षमता के 1 लाख 20 हजार 162 रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाए जा चुके हैं।
  • कुल क्षमता: प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के अन्तर्गत अब तक कुल 1948 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं।
  • सब्सिडी: पीएम सूर्यघर योजना में रूफटॉप सोलर स्थापित करने वाले उपभोक्ताओं को अब तक 824 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सब्सिडी वितरित की जा चुकी है।

6. 150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना से दोहरी बचत

सौर ऊर्जा से घरेलू उपभोक्ताओं की बचत को और बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने ‘150 यूनिट निःशुल्क बिजली योजना’ की शुरूआत की है। अक्टूबर माह में पंजीकरण शुरू होने के बाद से अब तक 2 लाख 69 हजार से अधिक उपभोक्ता इस योजना से जुड़ने के लिए अपनी सहमति दे चुके हैं।

  • अतिरिक्त राज्य सब्सिडी: इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा अपने घर की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने वाले पात्र उपभोक्ताओं को 17 हजार रुपये की अतिरिक्त राज्य सब्सिडी हस्तांतरित की जाती है।
  • यह राशि पीएम सूर्यघर योजना में देय अधिकतम 78 हजार रुपये की केन्द्रीय सहायता के अतिरिक्त है, जिससे उपभोक्ताओं को दोहरा लाभ मिल रहा है।

7. भविष्य की तैयारी: पीक ऑवर्स की डिमांड और बैटरी स्टोरेज पर फोकस

प्रदेश में बिजली की पीक ऑवर्स (Peak Hours) में अधिकतम डिमांड अब तक 19 हजार 165 मेगावाट रही है, जिसके वर्ष 2030 तक बढ़कर 25 हजार 48 मेगावाट होने का अनुमान है। इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा उम्मीद की किरण बनी है और राज्य सरकार बैटरी एनर्जी स्टोरेज क्षमता का विस्तार कर रही है।

  • मेगा प्रोजेक्ट्स: बीकानेर के पूगल में 6 हजार 400 मेगावाट ऑवर की विशाल बैटरी ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जा रही है।
  • सोलर पार्क: इसके साथ ही, यहां पर 2 हजार 450 मेगावाट क्षमता का देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क भी विकसित किया जा रहा है।
  • लक्ष्य: नवम्बर 2027 तक स्थापित होने वाली इन परियोजनाओं से पीक ऑवर्स की डिमांड को आसानी से पूरा किया जा सकेगा और राज्य को महंगी बिजली खरीद से मुक्ति मिलेगी।
  • स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024: इसके अन्तर्गत राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक 115 गीगावाट अक्षय ऊर्जा तथा 10 गीगावाट की ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

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