सिर्फ फोटो दिखाकर उठा लिया करोड़ों का भुगतान, जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार की नई परतें खुलीं

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जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई अब उदयपुर संभाग तक पहुँच गई है। उदयपुर रीजन में ठेका फर्मों और इंजीनियरों की मिलीभगत से बिना किसी धरातलीय कार्य के करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान उठाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है।

क्या है पूरा मामला?

उदयपुर रीजन के कई उपखंडों में ठेका फर्मों और विभागीय इंजीनियरों ने मिलकर एक बड़ा घोटाला किया है। आरोप है कि फर्मों ने केवल सामग्री के मौके पर पहुँचने की फोटो दिखाकर लगभग 300 करोड़ रुपये का भुगतान हासिल कर लिया, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हुआ।

जांच के घेरे में 235 इंजीनियर

एसीबी ने अब उदयपुर संभाग सहित अन्य क्षेत्रों में सक्रिय रहे 235 सहायक और अधिशासी इंजीनियरों को अपनी रडार पर ले लिया है। उदयपुर रीजन के कुछ उपखंडों में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने इनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव मांगा है। इसी के साथ, विभाग ने संदिग्ध इंजीनियरों को ‘कारण बताओ नोटिस’ भी जारी किए हैं।

आरोपियों की तलाश में दबिश जारी

जल जीवन मिशन घोटाले में नामजद सेवानिवृत्त आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित चार प्रमुख आरोपी फिलहाल भूमिगत हैं। एसीबी की छह टीमें दिल्ली, जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनसे पूछताछ के आधार पर एसआईटी (SIT) जांच को आगे बढ़ा रही है।

अन्य जिलों में भी गड़बड़ी की आशंका

उदयपुर के अलावा बाड़मेर, दौसा के महुवा और जोधपुर रीजन के कई जिलों में भी इसी तरह की गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं। एसीबी अब इन सभी फाइलों को खंगाल रही है ताकि भ्रष्टाचार की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके।

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