जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में चल रही चतुर्थ श्रेणी (ग्रुप-डी) भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित की गई अविश्वसनीय रूप से कम कट-ऑफ पर कड़ा प्रहार किया है। 5 मार्च 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी परीक्षा में शून्य या नकारात्मक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी को सरकारी सेवा के लिए पात्र मानना न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। अदालत ने इस स्थिति को भर्ती के न्यूनतम मानकों की खुली अनदेखी करार दिया है और सिस्टम की पारदर्शिता पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
अगली सुनवाई 9 मार्च को, संतोषजनक जवाब न मिलने पर होगी कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इस हलफनामे में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किन परिस्थितियों और नियमों के तहत कट-ऑफ का स्तर इतना नीचे (0.0033) रखा गया। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि 9 मार्च 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक सरकार की ओर से कोई तर्कसंगत और संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।
माइनस अंक वाले अभ्यर्थी की याचिका ने खोली व्यवस्था की पोल
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एक ऐसे अभ्यर्थी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया, जिसके अंक शून्य से भी कम थे। जब विभाग ने उसकी उम्मीदवारी रद्द की, तो उसने तर्क दिया कि चूंकि विभाग ने पहले से कोई ‘न्यूनतम पासिंग मार्क्स’ (Minimum Passing Marks) तय ही नहीं किए थे, तो उसे अयोग्य ठहराना गलत है। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कुछ विशेष श्रेणियों में कट-ऑफ महज 0.0033 तक गिर गई थी। इस खुलासे ने राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए अपनाए जा रहे मापदंडों पर एक नई बहस छेड़ दी है।
5670 पदों पर होनी है भर्ती, सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी चर्चा में
उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट के अधीन कुल 5670 पदों के लिए यह ग्रुप-डी भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में जारी है, जिसकी मुख्य परीक्षाएं अप्रैल 2026 में होना प्रस्तावित हैं। इसी बीच, जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया वह फैसला भी चर्चा में है, जिसमें कहा गया था कि आरक्षित वर्ग के मेधावी छात्र जो सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक लाते हैं, उन्हें जनरल कैटेगरी में ही गिना जाना चाहिए। अब हाईकोर्ट के इस ताजा रुख के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राज्य सरकार अपनी भर्ती नियमावली में सुधार करती है या अप्रैल में होने वाली परीक्षाओं पर इसका कोई असर पड़ता है।
