राजस्थान में ‘गांव ग्वाल योजना’ का शंखनाद: गाय चराने पर मिलेगी हर महीने सैलरी, कोटा से हुई शुरुआत

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कोटा | राजस्थान के कोटा जिले से गोवंश के संरक्षण और चरागाह भूमि को बचाने के लिए एक क्रांतिकारी ‘गांव ग्वाल योजना’ की शुरुआत की गई है। पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर और श्री राम स्नेही संप्रदाय शाहपुरा पीठ के जगतगुरु स्वामी रामदयाल महाराज ने चेचट तहसील के खेड़ली गांव से इस अभियान का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत गांव के गोवंश को व्यवस्थित तरीके से चराने के लिए ‘गांव ग्वाला’ नियुक्त किया जाएगा, जिसे मासिक वेतन दिया जाएगा।

क्या है ‘गांव ग्वाल योजना’?

इस योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लुप्त हो रही प्राचीन ‘ग्वाला परंपरा’ को पुनर्जीवित किया जा रहा है।

  • कार्य प्रणाली: नियुक्त किया गया ग्वाला प्रतिदिन सुबह गांव के सभी गोवंश को इकट्ठा कर गोचर (चरागाह) भूमि पर चराने ले जाएगा और शाम को उन्हें वापस उनके मालिकों के घर सुरक्षित पहुंचाएगा।
  • वेतन: प्रत्येक गांव ग्वाल को 10,000 रुपये प्रति माह की सैलरी दी जाएगी।
  • चयन प्रक्रिया: ग्वाला उसी गांव का बेरोजगार व्यक्ति होगा, जिसे ग्रामीण खुद चुनेंगे। अनिवार्य शर्त यह है कि वह व्यक्ति किसी भी प्रकार का नशा न करता हो।

बिना सरकारी हस्तक्षेप के ‘जनसहयोग’ से चलेगी योजना

मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया कि इस योजना में सरकार या किसी विभाग का सीधा हस्तक्षेप नहीं होगा। यह पूरी तरह से ‘जनसहयोग’ पर आधारित होगी:

  • निगरानी समिति: हर गांव में एक समिति बनाई जाएगी जिसमें सरपंच, वार्ड पंच और गांव के भामाशाह शामिल होंगे।
  • फंडिंग: ग्वाले की सैलरी का पैसा गांव के लोग ही आपस में मिलकर इकट्ठा करेंगे।
  • विस्तार: अभी रामगंजमंडी क्षेत्र के 14 गांवों में ग्वाले तैयार किए गए हैं, जिसे जल्द ही पूरे राजस्थान में लागू करने का लक्ष्य है।

योजना के बहुआयामी लाभ

मंत्री दिलावर के अनुसार, इस योजना के शुरू होने से कई समस्याओं का समाधान एक साथ होगा:

  1. सड़क हादसों में कमी: लोग गोवंश को खुला नहीं छोड़ेंगे, जिससे सड़कों पर होने वाले हादसों पर लगाम लगेगी।
  2. गोचर भूमि का संरक्षण: चरागाहों पर गोवंश की आवाजाही रहने से वहां अवैध अतिक्रमण नहीं हो सकेंगे।
  3. स्वास्थ्य: गायें सड़कों पर कचरा या प्लास्टिक खाने के बजाय प्राकृतिक चारा खाएंगी, जिससे वे स्वस्थ रहेंगी।
  4. रोजगार: गांव के ही बेरोजगार युवाओं को अपने ही क्षेत्र में सम्मानजनक काम मिल सकेगा।

मंत्री ने कहा कि आजादी से पहले तक यह व्यवस्था पूरे भारत में प्रचलित थी, जिसे अब आधुनिक और संगठित स्वरूप में वापस लाया जा रहा है।

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