जालोर: राजस्थान में पीटीआई (PTI) भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्रियों के जरिए नौकरी हथियाने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में रोज नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच में पता चला है कि विश्वविद्यालयों ने न सिर्फ बैक डेट में डिग्रियां बांटी, बल्कि खुद को बचाने के लिए ‘आग लगने’ की झूठी कहानियां भी रचीं। प्रदेश के तीन बड़े विश्वविद्यालयों से जुड़े फर्जीवाड़े ने पूरी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
OPJS यूनिवर्सिटी (चूरू): पढ़ाया 500 को, डिग्रियां बांटी 1359 को
एसओजी (SOG) राजगढ़ यूनिट ने जब ओपीजेएस (OPJS) विश्वविद्यालय, चूरू से 2018 और 2019 का बीपीएड (B.P.Ed) रिकॉर्ड मांगा, तो प्रबंधन ने बहाना बनाया कि रिकॉर्ड रूम में आग लगने से सभी दस्तावेज जल गए हैं।
- झूठ का पर्दाफाश: एसओजी की जांच में सामने आया कि 28 दिसंबर 2019 को आग विवि की मुख्य बिल्डिंग से 50 मीटर दूर एक बुक स्टोर में लगी थी, न कि रिकॉर्ड रूम में।
- सीटें कम, डिग्रियां ज्यादा: नियमों के अनुसार, विवि के पास बीपीएड की प्रतिवर्ष 100 सीटें ही मान्यता प्राप्त थीं। यानी 2016 से 2022 तक अधिकतम 500 अभ्यर्थियों को ही डिग्री मिल सकती थी। लेकिन, पीटीआई भर्ती में इसी विवि की डिग्री लगाकर 1359 अभ्यर्थियों ने आवेदन कर दिया।
- FIR दर्ज: एसओजी ने 20 फरवरी 2026 को ओपीजेएस यूनिवर्सिटी के प्रबंधन और 47 अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मामले में हरियाणा का जोगेन्द्र दलाल अभी जेल में है, जबकि रमन नांदल फरार चल रहा है।
जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी: 25 हजार फर्जी डिग्रियां आज भी ‘लापता’
एक दशक पहले (2015-16) सामने आया जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी का बहुचर्चित डिग्री कांड आज भी एक अनसुलझी पहेली है।
- एसओजी की ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों और विधानसभा में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बावजूद, करीब 25,000 फर्जी डिग्रियां आज कहां हैं, यह किसी को नहीं पता।
- सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि इन डिग्रियों को न तो वापस लिया गया और न ही नष्ट किया गया, जिसके कारण आज भी इनके दुरुपयोग का खतरा बना हुआ है। तत्कालीन प्रशासकों और अधिकारियों के पास भी इस मामले की कोई ठोस जानकारी नहीं है।
संस्कृत यूनिवर्सिटी: बिना कार्रवाई 282 ‘अवैध’ डिग्रियों पर लगाई मुहर
फर्जीवाड़े की इस सूची में जगदगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय (जयपुर) का नाम भी शामिल है।
- सत्र 2023-24 में विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों ने पीजीडीसीए (PGDCA) और पीजीडीवाईटी (PGDYT) कोर्स में 400 स्वीकृत सीटों की जगह 682 छात्रों को परीक्षा में बैठा दिया।
- यूनिवर्सिटी ने आंखें मूंदकर इन सभी को डिग्रियां बांट दीं। इस तरह 282 डिग्रियां अवैध रूप से जारी की गईं। बाद में मामले को दबाने के लिए यूनिवर्सिटी ने दोषी कॉलेजों से सिर्फ जुर्माना वसूला, लेकिन न तो कॉलेजों की मान्यता रद्द की गई और न ही छात्रों से वे डिग्रियां वापस ली गईं।
