जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों और कक्षाओं की मरम्मत में हो रही कछुआ चाल पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति महेंद्र कुमार गोयल और न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों की जान जोखिम में डालकर शिक्षा का व्यापार या सरकारी खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने मुख्य सचिव को स्कूल भवनों के निर्माण और मरम्मत को लेकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने और उस पर हलफनामा पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए यहाँ तक कह दिया कि जिन स्कूलों के भवन सुरक्षित नहीं पाए जाते, उन्हें आगामी 1 जुलाई से संचालित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा कि इस गंभीर विषय में “पैसे की कमी” का कोई भी बहाना स्वीकार्य नहीं होगा।
कागजों में चल रहा काम: 3700 स्कूलों की जरूरत पर सिर्फ 5 भवनों का निर्माण
सुनवाई के दौरान झालावाड़ स्कूल हादसे पर स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 3700 स्कूलों के लिए नए भवनों की आवश्यकता थी, जिनमें से केवल 114 को प्रशासनिक स्वीकृति मिली। उससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि अब तक केवल पांच भवनों का काम ही प्लिंथ (आधार) लेवल तक पहुँच पाया है, जबकि शेष भवनों का काम केवल कागजी औपचारिकताओं में ही उलझा हुआ है। मार्च का महीना करीब होने और बजट लैप्स होने की स्थिति के बावजूद टेंडर प्रक्रियाओं में हो रही देरी पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की।
प्री-प्राइमरी के लिए नए नियम और चार्टर्ड इंजीनियर की नियुक्ति का प्रस्ताव
मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किया है, जिसके तहत प्री-प्राइमरी के बच्चों की कक्षाएं अब केवल स्कूलों के भूतल (Ground Floor) पर ही संचालित की जा सकेंगी। कोर्ट ने सख्त हिदायत दी है कि छोटे बच्चों को न तो बेसमेंट में बिठाया जाए और न ही ऊपरी मंजिलों पर। इसके अलावा, जुलाई से लगातार हो रहे स्कूल भवनों के गिरने के हादसों को देखते हुए कोर्ट ने ‘चार्टर्ड इंजीनियर’ नियुक्त करने का सुझाव दिया है। ये इंजीनियर स्कूलों का निरीक्षण कर उन्हें ‘सेफ्टी सर्टिफिकेट’ देंगे और 1 जुलाई से केवल उन्हीं स्कूलों को चलने दिया जाएगा जिनके पास यह प्रमाण पत्र होगा।
प्रवासियों के सहयोग और केंद्र-राज्य के बीच बजट का पेंच
सुनवाई के दौरान बजट के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी भी दिखी। केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य ने बजट की जो मांग की है, उसकी पूरी जानकारी अभी तक साझा नहीं की गई है। दूसरी ओर, यह भी सामने आया कि सरकार ने स्कूल भवनों के लिए प्रवासी राजस्थानियों से आर्थिक सहयोग मांगा था, जिसके माध्यम से अब तक लगभग 11 करोड़ रुपये का फंड एकत्रित हुआ है। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को आइना दिखाते हुए कहा कि अदालती आदेश की पालना करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए संसाधनों का प्रबंधन उन्हें ही करना होगा।
