विशेष पड़ताल: नीरजा मोदी स्कूल में ‘अमायरा केस’ और बिना मान्यता 12वीं तक की कक्षाएं; आखिर मौन क्यों है सिस्टम?

जयपुर। राजस्थान सरकार प्रदेश के नौनिहालों को बेहतर शिक्षा देने और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियानों के जरिए समाज को नई दिशा देने का दावा करती है। लेकिन जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में मासूम अमायरा की जान जाने के बाद जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे इस दावों की हकीकत बयां कर रहे हैं। आरोप है कि यह स्कूल न केवल सुरक्षा मानकों में विफल रहा है, बल्कि बिना वैध मान्यता के भी धड़ल्ले से संचालित हो रहा है।

क्या है मान्यता का गणित? (Affiliation Rules)

किसी भी निजी शिक्षण संस्थान को चलाने के लिए कड़े नियम तय हैं। नियमानुसार, स्कूल को पहले राज्य सरकार से कक्षा 1 से 8 तक की मान्यता लेनी होती है। इसके बाद कक्षा 9 से 12 तक के लिए राज्य सरकार से अलग से मान्यता (NOC) लेनी अनिवार्य है, जिसके आधार पर ही केंद्र सरकार (CBSE) संबद्धता (Affiliation) प्रदान करती है।

गंभीर आरोप: सूत्रों और शिकायतों के अनुसार, नीरजा मोदी स्कूल को केवल 8वीं कक्षा तक की मान्यता प्राप्त है। इसके बावजूद यह संस्थान बेखौफ होकर 12वीं तक की कक्षाएं चला रहा है और खुद को CBSE संबद्ध बताकर बोर्ड परीक्षाएं आयोजित कर रहा है। सवाल यह है कि यदि मान्यता नहीं है, तो केंद्र और राज्य सरकार इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रही?

सिस्टम का ‘सुरक्षा कवच’ और बेखौफ प्रबंधन

अमायरा केस में अब तक स्कूल प्रबंधन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना कई संदेह पैदा करता है। ऐसा प्रतीत होता है कि ‘सिस्टम’ के कुछ रसूखदार लोगों ने इस संस्थान को अपना संरक्षण दे रखा है।

  • अभिभावकों की मजबूरी: वर्तमान में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं। अभिभावक अपने बच्चों का साल बचाने के लिए संस्थान की पैरवी करने को मजबूर हैं, लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि बिना मान्यता वाले स्कूल में उनके बच्चों का भविष्य कानूनी रूप से अधर में लटका हुआ है।
  • सरकार की चुप्पी: पिछली सरकार ने स्कूल को 8वीं तक की मान्यता दी थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने अब तक इसकी सुध नहीं ली। क्या यह सरकार की लाचारी है या जानबूझकर की जा रही अनदेखी?

मनमानी फीस और नियमों की अनदेखी

शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले इन संस्थानों में विद्यार्थियों से मनमानी फीस वसूली जा रही है। RTE (शिक्षा का अधिकार) के तहत होने वाले प्रवेशों में भी पारदर्शिता का अभाव दिख रहा है। जब नींव ही नियमों के उल्लंघन पर टिकी हो, तो वहां देश का भविष्य कितना सुरक्षित है, यह बड़ा सवाल है।

“अमायरा केस केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शिक्षा तंत्र की विफलता का प्रतीक है। जब तक बिना मान्यता के चल रहे ऐसे संस्थानों पर ताला नहीं लगेगा, तब तक मासूमों की जान जोखिम में रहेगी।”

राजस्थान विधानसभा सत्र के दौरान मालवीय नगर विधायक कालीचरण सराफ ने प्रदेश के छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता को सदन के सामने रखा। सराफ ने सरकार का ध्यान खींचते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाएं और होम एग्जाम्स बेहद नजदीक हैं, ऐसे में किसी एक संस्थान की गलती या विवाद के कारण हजारों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

सवाल: सुरक्षा और नियमों पर चुप्पी क्यों?

विधायक के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और नागरिक समाज में नई बहस छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि एक जन-प्रतिनिधि होने के नाते सराफ को उन संस्थानों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की मांग करनी चाहिए थी जो बिना वैध मान्यता के चल रहे हैं या जिनकी लापरवाही से ‘अमायरा’ जैसे मासूमों की जान जा रही है।

Live Sach – तेज़, भरोसेमंद हिंदी समाचार। आज की राजनीति, राजस्थान से ब्रेकिंग न्यूज़, मनोरंजन, खेल और भारतदुनिया की हर बड़ी खबर, सबसे पहले आपके मोबाइल पर पढ़ें! English News

Share This Article