जयपुर: कोचिंग छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए जिला प्रशासन सख्त, जारी की 22 सूत्रीय नई गाइडलाइन

राजस्थान की राजधानी जयपुर में कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मानसिक तनाव से बचाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने बड़े और सख्त कदम उठाए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और ‘राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) अधिनियम 2025’ की पालना करते हुए जयपुर के जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने 23 जनवरी 2026 को एक 22 सूत्रीय नई विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। इस नई व्यवस्था के तहत जयपुर के सभी कोचिंग संस्थानों, हॉस्टलों और पीजी के लिए कड़े नियम तय किए गए हैं ताकि छात्रों पर पढ़ाई का दोहरा भार न पड़े और वे किसी भी प्रकार के अवसाद का शिकार न हों।

टेस्ट परिणाम सार्वजनिक करने और बैच बांटने पर रोक

जिला प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों में सबसे महत्वपूर्ण कदम छात्रों के बीच पनपने वाली अनावश्यक और नकारात्मक प्रतिस्पर्धा को रोकना है। नए नियमों के अनुसार, अब कोचिंग संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले किसी भी टेस्ट का परिणाम सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, टेस्ट में आए अंकों के आधार पर छात्रों को अलग-अलग बैच में बांटने (बैच सेग्रीगेशन) की प्रथा पर भी प्रशासन ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि कोचिंग संस्थानों द्वारा छात्रों की प्रगति रिपोर्ट केवल उनके अभिभावकों को ही दी जाएगी। इसके अलावा, कोचिंग संस्थानों में प्रवेश से पूर्व छात्रों का प्रवेश टेस्ट आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि उनकी क्षमता का सही आकलन हो सके।

साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य, त्योहारों पर भी मिलेगी छुट्टी

छात्रों को मानसिक राहत देने और पढ़ाई के बोझ को कम करने के लिए कोचिंग संस्थानों को साप्ताहिक अवकाश देना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। प्रशासन ने यह भी सख्त निर्देश दिया है कि अवकाश के ठीक अगले दिन कोई भी टेस्ट आयोजित नहीं किया जाएगा ताकि छात्र अपनी छुट्टी के दिन पढ़ाई के तनाव से मुक्त रह सकें। इसके साथ ही, सभी प्रमुख त्योहारों पर भी छात्रों को अनिवार्य रूप से अवकाश देना होगा। छात्रों के मनोरंजन और तनाव मुक्ति के लिए समय-समय पर विभिन्न मोटिवेशनल स्पीकर्स द्वारा लाइफ मैनेजमेंट के सेशन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

रिफंड पॉलिसी, नियमित पीटीएम और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग

इस नई गाइडलाइन में छात्रों और अभिभावकों के आर्थिक हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। जयपुर के सभी संस्थानों को अब ‘ईजी एग्जिट और रिफंड पॉलिसी’ (Easy Exit and Refund Policy) की सख्ती से पालना करनी होगी। छात्रों की मानसिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य मनोवैज्ञानिक सलाहकारों (Counselors) की नियुक्ति करने और अभिभावकों के साथ नियमित पीटीएम (PTM) आयोजित करने को कहा गया है। शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करते हुए 24×7 हेल्पलाइन, ई-कंप्लेंट पोर्टल और जिला स्तर पर एक कंट्रोल रूम की स्थापना भी की जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से हॉस्टल और कोचिंग में बायोमेट्रिक उपस्थिति और एफआरटी (FRT) का प्रयोग किया जाएगा।

हॉस्टल और पीजी की होगी सघन जांच, स्टाफ को गेटकीपर ट्रेनिंग

कलेक्टर ने नगर निगम और पुलिस विभाग को शहर के सभी हॉस्टल व पीजी का सघनता से निरीक्षण करने के कड़े निर्देश दिए हैं। ऐसे किसी भी कोचिंग संस्थान या हॉस्टल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी जहां अग्निशमन यंत्र (Fire Safety System) या अन्य जरूरी सुविधाएं नगर निगम के नियमों के अनुसार मौजूद नहीं हैं। इसके अलावा, हॉस्टल और पीजी में कार्यरत सभी स्टाफ के लिए ‘गेटकीपर ट्रेनिंग’ भी अनिवार्य की गई है। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य यह है कि स्टाफ छात्रों के व्यवहार में आने वाले किसी भी नकारात्मक बदलाव या अवसाद के लक्षणों को समय रहते पहचान सकें और किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।

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