अरावली पर सुप्रीम कोर्ट का यू-टर्न: पुरानी परिभाषा वाले आदेश पर लगाई रोक, राजस्थान सहित 4 राज्यों से मांगा जवाब

नई दिल्ली/जयपुर। अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने अपने ही 20 नवंबर के उस आदेश पर रोक (Stay) लगा दी है, जिसमें अरावली की पहाड़ियों के लिए ‘100 मीटर ऊंचाई’ वाली परिभाषा को मंजूरी दी गई थी। कोर्ट ने अब इस मामले में केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार सहित चार राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

नई विशेषज्ञ समिति का होगा गठन सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक नई विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) के गठन का आदेश दिया है। यह समिति अरावली की परिभाषा और उसके संरक्षण से जुड़े पहलुओं की दोबारा जांच करेगी। कोर्ट ने माना कि पुरानी परिभाषा (100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली न मानना) से पर्यावरण को भारी नुकसान हो सकता है और अवैध खनन को बढ़ावा मिल सकता है।

केंद्र और राज्यों को नोटिस कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के साथ-साथ अरावली क्षेत्र में आने वाले चार राज्यों—राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली—को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इनसे पूछा है कि अरावली के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और नई परिभाषा के संभावित प्रभावों पर उनका क्या मत है।

क्या था विवाद? दरअसल, 20 नवंबर के आदेश में अरावली पहाड़ी उसे माना गया था जिसकी ऊंचाई 100 मीटर या उससे अधिक हो। पर्यावरणविदों और विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे अरावली का एक बड़ा हिस्सा (जो 100 मीटर से कम ऊंचा है) खनन माफियाओं के लिए खुल जाएगा, जिससे राजस्थान और एनसीआर के पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाकर पर्यावरण प्रेमियों और आमजन को बड़ी राहत दी है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।

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