नई दिल्ली: आज जब दुनिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की ‘केमिस्ट्री’ और एक ही गाड़ी में सफर करने की तस्वीरें देख रही है, तो यह जानना जरूरी है कि यह याराना कोई नया नहीं है। इस दोस्ती की नींव आज से लगभग 25 साल पहले ही पड़ गई थी।
इतिहास के पन्ने पलटने पर वर्ष 2001 की वो तस्वीरें सामने आती हैं, जो बताती हैं कि मोदी और पुतिन का रिश्ता पद से नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और पुराने विश्वास से जुड़ा है।
2001 का वो दौरा: जब ‘सीएम’ मोदी मिले थे पुतिन से यह वाकया नवंबर 2001 का है। तब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उस समय भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी रूस के आधिकारिक दौरे पर गए थे। उस प्रतिनिधिमंडल में नरेंद्र मोदी भी शामिल थे।
मॉस्को में हुई उस मुलाकात के दौरान एक युवा नेता के तौर पर नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की थी। उस समय भी दोनों के बीच गर्मजोशी देखी गई थी।
वाजपेयी की मौजूदगी में हस्ताक्षर उस दौर की एक ऐतिहासिक तस्वीर गवाह है जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी और व्लादिमीर पुतिन बैठे हुए हैं, और उनके पीछे नरेंद्र मोदी खड़े हैं। एक अन्य अवसर पर सीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर भी हुए थे।
समय बदला, लेकिन विश्वास नहीं विशेषज्ञों का कहना है कि 2001 से 2025 तक का सफर लंबा रहा है। नरेंद्र मोदी ‘मुख्यमंत्री’ से दुनिया के सबसे लोकप्रिय ‘प्रधानमंत्री’ बन गए, लेकिन पुतिन के साथ उनका वह पुराना आत्मीय संबंध आज भी कायम है।
- पीएम मोदी अक्सर कहते हैं कि रूस भारत का ‘हर मौसम का साथी’ (All-weather friend) है।
- पुतिन भी कई मंचों पर पीएम मोदी की नीतियों और उनके ‘मेक इन इंडिया’ विजन की तारीफ कर चुके हैं।
आज की उनकी मुलाकात उसी 25 साल पुराने भरोसे का विस्तार है, जिसने कूटनीति से परे एक व्यक्तिगत दोस्ती का रूप ले लिया है।
