भारत में सरकारी नौकरी (Government Job) का क्रेज किसी से छिपा नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ‘सुरक्षा’ और ‘छुट्टियां’ मानी जाती हैं। लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि एक सरकारी कर्मचारी साल के 365 दिनों में से 192 दिन छुट्टी पर रह सकता है? सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि सरकारी बाबू साल भर में आधे से ज्यादा दिन तो घर पर ही बिताते हैं। इस ‘गणित’ को देखकर प्राइवेट नौकरी वालों का सिर चकरा गया है।
वायरल वीडियो का ‘अनोखा गणित’
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में छुट्टियों का जो कैलकुलेशन समझाया गया है, वह काफी दिलचस्प है। दावे के मुताबिक:
- 365 दिन (कुल साल)
- 104 दिन: शनिवार और रविवार की छुट्टियां (5-डे वीक के हिसाब से)।
- 10-12 दिन: त्योहारों और गस्टेड हॉलीडेज (Gazetted Holidays)।
- 30 दिन: अर्न लीव (EL – जो जमा होती है)।
- 20 दिन: मेडिकल लीव (Half Pay Leave)।
- 12-14 दिन: कैजुअल लीव (CL) और रिस्ट्रिक्टेड हॉलीडे (RH)।
- अन्य: पितृत्व/मातृत्व अवकाश या अन्य विशेष छुट्टियां।
इस हिसाब से अगर सब कुछ जोड़ दिया जाए, तो आंकड़ा 190-192 दिनों के आसपास पहुंच जाता है। वीडियो बनाने वाले का तर्क है कि सरकारी कर्मचारी साल में मुश्किल से 170-175 दिन ही काम करते हैं।
क्या है इस दावे की हकीकत?
हालांकि यह गणित सुनने में बहुत अच्छा लगता है, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। नियमों के मुताबिक:
- सभी जगह 5-डे वीक नहीं: केंद्र सरकार और कुछ राज्य विभागों को छोड़कर, आज भी कई सरकारी विभागों में हफ्ते में 6 दिन काम होता है (सिर्फ दूसरा और चौथा शनिवार छुट्टी)।
- छुट्टी अधिकार नहीं: EL (अर्जित अवकाश) और मेडिकल लीव कोई भी कर्मचारी अपनी मर्जी से कभी भी नहीं ले सकता। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है और यह बेहद जरूरी काम या बीमारी पर ही मिलती है।
- वर्कलोड: कई विभागों (जैसे पुलिस, रेलवे, स्वास्थ्य) में कर्मचारियों को त्योहारों पर भी छुट्टी नहीं मिलती और काम के घंटे तय सीमा से कहीं ज्यादा होते हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों के रिएक्शन
इस वीडियो पर यूजर्स जमकर मजे ले रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “बस इसीलिए तो सरकारी नौकरी चाहिए, ताकि सुकून से जी सकें।” वहीं, प्राइवेट सेक्टर वालों ने तंज कसते हुए कहा, “इधर हमें संडे को भी लैपटॉप खोलना पड़ता है और वहां साल का आधा वक्त छुट्टियों में बीतता है।” कुछ लोगों ने इसे सिस्टम पर कटाक्ष भी बताया है।
निष्कर्ष यह है कि 192 छुट्टियों का दावा ‘सैद्धांतिक’ (Theoretical) रूप से भले ही सही लगे, लेकिन व्यावहारिक (Practical) रूप से इसे एक साथ लेना नामुमकिन है।
