“छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता।”
भारतीय राजनीति के अजातशत्रु, ओजस्वी वक्ता और कोमल हृदय कवि—अटल बिहारी वाजपेयी जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था. वे न केवल तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे, बल्कि एक ऐसे राजनेता थे जिन्हें विपक्ष भी उतना ही सम्मान देता था जितना उनका अपना दल.
यह ब्लॉग पोस्ट आपको अटल जी के जीवन के हर पहलू—उनके बचपन से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक के सफर, उनकी दिल को छू लेने वाली कविताओं और जीवन बदलने वाले विचारों—से रूबरू कराएगी.
संक्षिप्त परिचय (Quick Facts)
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | अटल बिहारी वाजपेयी |
| जन्म | 25 दिसंबर 1924 |
| जन्म स्थान | ग्वालियर, मध्य प्रदेश |
| पिता | पं. कृष्ण बिहारी वाजपेयी |
| माता | कृष्णा देवी |
| शिक्षा | एम.ए. (राजनीति विज्ञान) |
| प्रमुख पद | भारत के प्रधानमंत्री (3 बार), विदेश मंत्री |
| पुरस्कार | भारत रत्न (2015), पद्म विभूषण (1992) |
| निधन | 16 अगस्त 2018 |
| समाधि स्थल | सदैव अटल (नई दिल्ली) |
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
अटल जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर के एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनके पिता एक स्कूल शिक्षक और कवि थे, जिनसे उन्हें कविता और साहित्य का संस्कार विरासत में मिला. उनकी माता कृष्णा देवी धार्मिक विचारों वाली महिला थीं.
शिक्षा:
- उन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) से स्नातक किया.
- कानपुर के डी.ए.वी. कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एम.ए. की डिग्री प्रथम श्रेणी में प्राप्त की.
- कानून की पढ़ाई के दौरान ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्य में पूरी तरह जुट गए और पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी.
राजनीतिक सफर: शून्य से शिखर तक
अटल जी का राजनीतिक सफर संघर्ष और धैर्य की एक मिसाल है.
- शुरुआत: 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में भाग लेने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा. बाद में वे जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ काम किया.
- संसद में गूंज: 1957 में वे पहली बार बलरामपुर से सांसद बने. उनके भाषणों से प्रभावित होकर पंडित नेहरू ने भविष्यवाणी की थी कि यह युवक एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा.
- हिंदी का मान: 1977 में विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र (UN) में पहली बार हिंदी में भाषण देकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया.
- अंधेरा छटेगा: 1980 में भाजपा की स्थापना के समय मुंबई में उन्होंने एक ऐतिहासिक भविष्यवाणी की थी:“अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।”
प्रधानमंत्री कार्यकाल
वे तीन बार भारत के प्रधानमंत्री बने:
- 1996: मात्र 13 दिन के लिए.
- 1998-1999: 13 महीने के लिए (पोखरण परीक्षण इसी दौरान हुआ).
- 1999-2004: पूरे 5 साल का कार्यकाल (ऐसा करने वाले वे पहले गैर-कांग्रेसी पीएम थे).
प्रमुख उपलब्धियां (Key Achievements)
अटल जी के कार्यकाल ने भारत की तस्वीर बदल दी:
- पोखरण-II (1998): दुनिया के दबाव के बावजूद परमाणु परीक्षण कर भारत को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनाया. उन्होंने नारा दिया— “जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान”.
- कारगिल विजय (1999): पाकिस्तान की घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दिया और ‘ऑपरेशन विजय’ के जरिए भारत को जीत दिलाई.
- स्वर्णिम चतुर्भुज योजना: दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाली यह सड़क परियोजना भारत के बुनियादी ढांचे में क्रांति लेकर आई.
- दिल्ली मेट्रो और दूरसंचार: दिल्ली मेट्रो की शुरुआत और मोबाइल क्रांति (टेलीकॉम पॉलिसी 1999) का श्रेय उन्हीं को जाता है.
- सर्व शिक्षा अभियान: 6 से 14 साल के बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया.
व्यक्तिगत जीवन और रुचियां
बहुत कम लोग जानते हैं कि राजनीति के अलावा अटल जी एक बेहतरीन इंसान और भोजन प्रेमी (Foodie) भी थे.
- पसंदीदा भोजन: उन्हें ग्वालियर की चाट, आगरा के पेठे और पुरानी दिल्ली की नॉन-वेज डिशेज बहुत पसंद थीं. उन्हें ‘झींगा’ (Prawns) और मालपुआ भी बेहद पसंद था.
- परिवार: अटल जी आजीवन अविवाहित रहे, लेकिन उन्होंने राजकुमारी कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को दत्तक पुत्री (Adopted Daughter) के रूप में अपनाया. नमिता और उनके परिवार ने ही अटल जी की अंतिम समय तक सेवा की.
अटल जी की प्रसिद्ध कविताएं (Famous Poems)
अटल जी कहते थे, “मैं राजनेता तो हालात की वजह से हूँ, लेकिन कवि मैं जन्म से हूँ।” उनकी कुछ मशहूर पंक्तियाँ:
1. गीत नया गाता हूँ
“टूटे हुए तारों से फूटे बासंती स्वर, पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर, झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात, प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ। गीत नया गाता हूँ।”
2. मौत से ठन गई
“मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं, ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं। मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ, लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ? … मौत से ठन गई!”
3. ऊँचाई
“मेरे प्रभु! मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना, ग़ैरों को गले न लगा सकूँ, इतनी रुखाई कभी मत देना।”
अटल बिहारी वाजपेयी के अनमोल विचार (Quotes)
- धर्मनिरपेक्षता पर: “यदि भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है, तो भारत, भारत ही नहीं है।”
- पड़ोसी पर: “आप मित्र बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं।”
- लोकतंत्र पर: “सरकारें आएंगी, जाएंगी; पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी; मगर यह देश रहना चाहिए।”
- हार-जीत पर: “जीत और हार जीवन का एक हिस्सा है, जिसे समानता के साथ देखा जाना चाहिए।”
- शक्ति और शांति: “हम अहिंसा में विश्वास करते हैं और चाहते हैं कि दुनिया के संघर्ष शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाए जाएं, लेकिन हम यह भी मानते हैं कि शांति की रक्षा के लिए शक्ति आवश्यक है।”
उपसंहार
16 अगस्त 2018 को लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया. उनकी समाधि को ‘सदैव अटल’ नाम दिया गया है, जो कमल के फूल के आकार में बनी है. उनका जन्मदिन (25 दिसंबर) भारत में ‘सुशासन दिवस’ (Good Governance Day) के रूप में मनाया जाता है.
अटल जी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कविताएं और उनके विचार सदैव भारतवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे.
“आओ फिर से दिया जलाएँ, भरी दुपहरी में अंधियारा, सूरज परछाई से हारा, अंतरतम का नेह निचोड़ें, बुझी हुई बाती सुलगाएँ। आओ फिर से दिया जलाएँ।”
