भारत के युवाओं के लिए 12 जनवरी का दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि ऊर्जा और संकल्प का महापर्व है। इस वर्ष देश अपने सबसे बड़े प्रेरणास्त्रोत और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की जयंती को 42वें राष्ट्रीय युवा दिवस (42nd National Youth Day) के रूप में मनाने जा रहा है। स्वामी जी के ओजस्वी विचार आज भी देश के करोड़ों युवाओं के लिए मार्गदर्शन का काम करते हैं और यह दिवस उसी चेतना को जगाने का एक सशक्त माध्यम है।

1984 में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय
स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता और युवाओं पर उनके गहरे प्रभाव को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1984 में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया था। सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की थी कि स्वामी विवेकानंद की जयंती (12 जनवरी) को प्रतिवर्ष ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इस घोषणा का उद्देश्य देश की युवा शक्ति को स्वामी जी के जीवन और आदर्शों से जोड़ना था, ताकि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें।
1985 से शुरू हुआ सफर, आज बनी परंपरा
सरकार की घोषणा के बाद, 1985 से पूरे भारत में इस कार्यक्रम को मनाने की शुरुआत हुई। तब से लेकर आज तक, यह सिलसिला अनवरत जारी है। इस वर्ष हम इस आयोजन के 42वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में इस दिन विशेष कार्यक्रम, भाषण प्रतियोगिताएं और रैलियां आयोजित की जाती हैं, ताकि नई पीढ़ी को “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए” का मंत्र याद दिलाया जा सके।
युवाओं को प्रेरित करना ही मुख्य ध्येय
राष्ट्रीय युवा दिवस का मूल उद्देश्य भारत के युवाओं को प्रेरित करना है। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि “मेरी आशा मेरा युवा वर्ग है।” इसी सपने को साकार करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। इसका लक्ष्य युवाओं के भीतर छिपी असीम ऊर्जा को सही दिशा देना और उन्हें देश की संस्कृति, गौरव और विकास के प्रति जागरूक करना है। आज के डिजिटल युग में भी स्वामी जी के विचार युवाओं को डिप्रेशन और भटकाव से बचाकर कर्मठ बनने की राह दिखाते हैं।
