जज्बे को सलाम: ओडिशा की पायल नाग बनीं दुनिया की पहली बिना हाथ-पैर वाली तीरंदाज, 5 साल की उम्र में करंट से गंवा दिए थे चारों अंग

Ravindar Nagar

बलांगीर (ओडिशा): कहा जाता है कि अगर हौसले बुलंद हों, तो शरीर की कमियां कभी बाधा नहीं बनतीं। इस बात को सच कर दिखाया है ओडिशा के बलांगीर जिले की बेटी पायल नाग (Payal Nag) ने। पायल दुनिया की पहली ऐसी तीरंदाज (Archer) बन गई हैं, जो बिना किसी अंग (हाथ और पैर) के प्रतिस्पर्धा करती हैं। उनकी यह कहानी केवल खेल जगत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए ‘शुद्ध साहस’ (Pure Courage) और प्रेरणा की मिसाल है।

5 साल की उम्र में हुआ था भीषण हादसा पायल का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। जब वह महज 5 साल की थीं, तब एक दर्दनाक बिजली दुर्घटना (Electrocution Accident) ने उनका सब कुछ छीन लिया। करंट लगने की वजह से उन्हें अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवाने पड़े। एक बच्चे के लिए यह आघात इतना गहरा था कि कोई भी जीवन से हार मान लेता, लेकिन पायल ने हार नहीं मानी।

हर बाधा को पार कर बनीं चैंपियन शारीरिक सीमाओं को चुनौती देते हुए पायल ने तीरंदाजी (Archery) को अपना हथियार बनाया। बिना हाथ-पैरों के धनुष उठाना और निशाना लगाना असंभव लगता है, लेकिन पायल ने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से इसे संभव कर दिखाया।

  • उपलब्धि: आज वह एक नेशनल चैंपियन हैं।
  • रिकॉर्ड: वह दुनिया की पहली ऐसी पैरा-आर्चर हैं, जो चारों अंग न होने के बावजूद सटीक निशाना लगाती हैं।

ओडिशा का गौरव पायल नाग की इस सफलता ने ओडिशा का नाम विश्व पटल पर रोशन किया है। उनकी कहानी यह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, इंसान की इच्छाशक्ति उसे किसी भी मुकाम पर पहुंचा सकती है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें “असली हीरो” बता रहे हैं।

Web Title – Payal Nag World’s First Archer Without Limbs: The Inspiring Story of Odisha’s Blade Archer

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