नई दिल्ली: भारतीय सेना (Indian Army) अपनी वीरता के साथ-साथ अपनी अनूठी परंपराओं के लिए भी जानी जाती है। जब असम रेजिमेंट की टुकड़ी मार्च करती है और सैनिक एक सुर में गाते हैं— “बदलूराम का बदन ज़मीन के नीचे है, और हमको उसका राशन मिलता है”—तो हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर यह बदलूराम कौन थे और उनका राशन दूसरों को क्यों मिलता है?
यह सिर्फ गीत नहीं, इतिहास है यह गीत द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय का है। यह कहानी सिपाही बदलूराम की है, जो असम रेजिमेंट के एक जवान थे।
- शहादत: 1944 में जापानियों के खिलाफ लड़ते हुए बदलूराम शहीद हो गए थे।
- क्वार्टर मास्टर की चतुराई: युद्ध के दौरान सप्लाई लाइन कट चुकी थी। गलती से या जानबूझकर, बदलूराम का नाम राशन की लिस्ट से नहीं हटाया गया। क्वार्टर मास्टर उनके नाम का राशन (रसद) निकालते रहे।
- कैसे बची जान: जब रेजिमेंट को जापानियों ने घेर लिया और रसद खत्म होने लगी, तब बदलूराम के नाम पर जमा हुआ वह ‘अतिरिक्त राशन’ ही था जिसने पूरी कंपनी को भूख से मरने से बचाया और उन्हें लड़ने की ताकत दी।
आज भी गूंजता है यह तराना इस घटना के बाद, बदलूराम के सम्मान में यह गीत बना। यह गीत ‘बैटल हायम ऑफ द रिपब्लिक’ (John Brown’s Body) की धुन पर आधारित है। इसका मतलब यह है कि भले ही बदलूराम अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी वजह से आज भी उनके साथी जीवित हैं और लड़ रहे हैं।
गीत के बोल (Lyrics): “एक खूबसूरत लड़की थी, जिसको मैं प्यार करता था… एक खूबसूरत लड़की थी, जिसको मैं प्यार करता था… लेकिन अब वो नहीं है… बदलूराम का बदन ज़मीन के नीचे है, बदलूराम का बदन ज़मीन के नीचे है, बदलूराम का बदन ज़मीन के नीचे है, तो हमको उसका राशन मिलता है! शाबाश… शाबाश… शाबाश…”
Web Title – The Story Behind Assam Regiment Song: Badluram Ka Badan and World War II History
