जयपुर: कहते हैं कि हौसले अगर चट्टान हों, तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं। राजस्थान की एक बेटी ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। नए साल 2026 के पहले दिन, जब दुनिया जश्न मना रही थी, तब जयपुर जिले के जमवारामगढ़ तहसील के छोटे से गांव थोलाई की बेटी और दौसा की बहू, धोली मीणा (Dholi Meena), भारत से 16,000 किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिका में एक नया इतिहास लिख रही थीं।
धोली मीणा ने इक्वाडोर (Ecuador) में स्थित रुकु पिचिंचा (Rucu Pichincha) की बेहद दुर्गम और खतरनाक चोटी को फतह किया है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि उन्होंने 15,414 फीट (4696 मीटर) की यह चढ़ाई किसी आधुनिक माउंटेनियरिंग सूट में नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक राजस्थानी पोशाक घाघरा-लुगड़ी में पूरी की। ऐसा करने वाली वे पहली भारतीय महिला बन गई हैं।

सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द और गर्व अपनी इस अविश्वसनीय यात्रा को धोली मीणा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट के जरिए साझा किया है, जो अब वायरल हो रहा है।
“लोग ताने देते थे…” धोली लिखती हैं, “मैं उस गांव की साधारण सी बेटी हूँ, जहाँ लड़कियां खेतों में काम करती हैं और मेले-त्योहारों में नाचती-गाती हैं। जहाँ ऊंचे सपने देखना भी मुश्किल होता है। लोग मुझे कहते थे – ‘घाघरा पहनकर क्या पर्वत चढ़ेगी?’ लेकिन मैंने ठान लिया था कि यही घाघरा-लुगड़ी मेरी कमजोरी नहीं, मेरी ताकत और पहचान बनेगा।”
“मौत को चुनौती दे रहा था हर कदम” 1 जनवरी 2026 की उस चढ़ाई को याद करते हुए वे लिखती हैं, “ठंडी हवाएं शरीर को चीर रही थीं। रास्ते इतने दुर्गम थे कि हर कदम मौत को चुनौती दे रहा था। ऊंचाई पर सांसें थम सी जा रही थीं… लेकिन दिल में भारतीय जज्बा था और राजस्थानी बहनों का वो गर्व, जो सदियों से मुश्किलों से लड़ती आई हैं।”
तिरंगा लहराया तो छलक पड़े आंसू चोटी पर पहुंचने के उस पल को उन्होंने ऐतिहासिक बताया। “जब चोटी पर पहुंचकर हमने भारतीय तिरंगे को फहराया, तो वो लहराता झंडा देखकर आंसू रुक नहीं रहे थे। हजारों मील दूर, एक घाघरा-लुगड़ी पहनने वाली भारत की बेटी ने पहली बार इस चोटी पर तिरंगा लहराया था। यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है, यह हर उस राजस्थानी बहन की जीत है जो सपने देखती है और अपनी परंपरा पर गर्व करती है।”
प्रवासी भारतीयों का मिला साथ धोली ने इस सफलता का श्रेय इक्वाडोर में रहने वाले भारतीय समुदाय, खासकर उत्तराखंड के अपने भाइयों को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। इक्वाडोर के स्थानीय दोस्त भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
संदेश: “संस्कृति हमारी शान है” अंत में, धोली मीणा ने देश की सभी बेटियों के लिए एक सशक्त संदेश दिया:
“यह पल चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है – हमारी संस्कृति हमारी कमजोरी नहीं, हमारी शान है! हम राजस्थानी बहनें योद्धा हैं, परंपरा को गर्व से जीती हैं और दुनिया की ऊंचाइयों को भी जीत सकती हैं! अपनी संस्कृति पर गर्व करो, और सपनों की सबसे ऊंची चोटी फतह करो!”
