जयपुर: नए साल (2026) के आगमन के साथ पिंक सिटी जयपुर में उत्सव का माहौल है। यहाँ आयोजित सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 (Saras Rajsakhi National Fair 2025) इन दिनों रंगों, रचनात्मकता और ग्रामीण हुनर की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरा है। 30 दिसंबर की शाम तक मेले की रौनक देखते ही बन रही थी और जयपुरवासी बड़ी संख्या में यहाँ खिंचे चले आ रहे हैं।
यह मेला देशभर से आई स्वयं सहायता समूहों (SHG – Self Help Groups) की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉल्स, उनकी अनूठी प्रस्तुति, सृजनशीलता और कड़ी मेहनत की कहानी खुद बयां कर रहा है।
भारतीय टेक्सटाइल का अद्भुत संगम मेले में भारतीय टेक्सटाइल की विविधता आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। यहाँ पारंपरिक और आधुनिक डिज़ाइनों का एक खूबसूरत संगम देखने को मिल रहा है।
- परिधान: रंग-बिरंगे परिधानों में सजी साड़ियां, आकर्षक दुपट्टे और सुरुचिपूर्ण सूट महिलाओं को खास तौर पर लुभा रहे हैं।
- सर्दी की तैयारी: सर्द मौसम को देखते हुए उच्च गुणवत्ता वाले ऊनी वस्त्रों की भी खूब मांग है। आगंतुकों का कहना है कि हस्तनिर्मित (Handmade) होने के बावजूद इन उत्पादों की बारीक कारीगरी और किफायती दाम उन्हें खरीदारी के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
हस्तशिल्प और ऑर्गेनिक स्वाद कपड़ों के अलावा घर की सजावट से जुड़े उत्पाद भी लोगों को पसंद आ रहे हैं। मिट्टी, लकड़ी, कपड़े और प्राकृतिक सामग्री से तैयार सजावटी वस्तुएं लोगों के घरों में देसी सौंदर्य और आत्मीयता का अहसास जोड़ रही हैं। वहीं, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं द्वारा तैयार किए गए ऑर्गेनिक स्नैक्स (Organic Snacks) और पारंपरिक स्वादों से भरपूर खाद्य पदार्थ भी फूड लवर्स की पहली पसंद बन रहे हैं।
सिर्फ बाजार नहीं, सशक्तिकरण का मंच सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला केवल एक बाजार भर नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का एक सशक्त मंच है।
- यह मेला महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, आत्मनिर्भर बनने और आजीविका के नए अवसर सृजित करने का मौका दे रहा है।
- यहाँ उन्हें मार्केटिंग, प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन और ग्राहकों से संवाद (Customer Interaction) जैसे महत्वपूर्ण कौशल सीखने का व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है, जो उनके भविष्य को मजबूत बनाएगा।
केरल की लोक कलाओं ने बांधा समां मेले की सांस्कृतिक संध्याएं इस आयोजन में चार चांद लगा रही हैं। इसी कड़ी में केरल (Kerala) की पारंपरिक लोक कलाओं—चंदा (Chanda) और नड़पट्टू (Nadappattu) की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का दिल जीत लिया। तालबद्ध संगीत की गूंज और कलाकारों की ऊर्जावान प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया, जिसे दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।
कुल मिलाकर, सरस राजसखी राष्ट्रीय मेला 2025 न केवल खरीदारी और मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, शिल्प और महिला शक्ति के उत्सव के रूप में नए साल की शुरुआत को यादगार बना रहा है।
