Pravin Togadia: भारतीय राजनीति और हिंदुत्व के इतिहास में डॉ. प्रवीण तोगड़िया एक ऐसा नाम है, जो अपने समर्थकों के लिए ‘धर्म रक्षक’ हैं और आलोचकों के लिए ‘कट्टरपंथी’। ऑपरेशन थिएटर में मरीजों की जान बचाने वाले एक शांत डॉक्टर से लेकर मंच पर आग उगलने वाले फायरब्रांड नेता बनने तक का उनका सफर बेहद नाटकीय रहा है।
आज की हमारी विशेष रिपोर्ट में हम आपको रूबरू करा रहे हैं अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद (AHP) के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण तोगड़िया के जीवन के उन पन्नों से, जो संघर्ष, सत्ता और विवादों की स्याही से लिखे गए हैं।

1. किसान का बेटा, जो बना कैंसर सर्जन (प्रारंभिक जीवन) 12 दिसंबर 1956 को गुजरात के अमरेली जिले (सौराष्ट्र) में एक साधारण पाटीदार (पटेल) किसान परिवार में जन्मे तोगड़िया बचपन से ही मेधावी थे।
- शिक्षा: 10वीं कक्षा में मेरिट हासिल करने के बाद उन्होंने एमबीबीएस (MBBS) किया और फिर एमएस (MS – सर्जिकल ऑन्कोलॉजी) की डिग्री ली।
- डॉक्टर तोगड़िया: राजनीति में पूर्णकालिक होने से पहले, उन्होंने लगभग 14 साल तक एक सफल कैंसर सर्जन के रूप में प्रैक्टिस की। अहमदाबाद में उनका ‘धन्वंतरि अस्पताल’ काफी प्रसिद्ध था। साथी डॉक्टर बताते हैं कि मरीजों के प्रति उनका व्यवहार बेहद सौम्य था, जो उनकी राजनीतिक छवि के बिल्कुल उलट था।
2. संघ से जुड़ाव और राम मंदिर आंदोलन महज 10 साल की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखा में जाने लगे थे।
- 1983 में VHP में एंट्री: उनकी वाकपटुता को देखते हुए उन्हें विश्व हिंदू परिषद (VHP) की जिम्मेदारी सौंपी गई।
- आंदोलन का चेहरा: 90 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अशोक सिंघल के साथ तोगड़िया ने अहम भूमिका निभाई। उनकी आक्रामक भाषण शैली ने उन्हें रातों-रात हिंदू युवाओं का आइकन बना दिया। वे VHP के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव और फिर कार्यकारी अध्यक्ष बने।
3. मोदी और तोगड़िया: ‘जय-वीरू’ जैसी दोस्ती और फिर दरार यह उनके जीवन का सबसे चर्चित अध्याय है। 1980 के दशक में गुजरात में नरेंद्र मोदी और प्रवीण तोगड़िया की जोड़ी मशहूर थी।
- स्कूटर की सवारी: पुराने जानकार बताते हैं कि नरेंद्र मोदी (तब बीजेपी संगठन मंत्री) अक्सर तोगड़िया के स्कूटर या बाइक पर पीछे बैठकर संघ का प्रचार करने जाते थे। मोदी रणनीतिकार थे और तोगड़िया के पास जनाधार (पाटीदार और हिंदू वोट) था।
- दरार (2001 के बाद): जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तो सत्ता और संगठन के बीच टकराव शुरू हुआ। मोदी अपनी छवि एक ‘विकास पुरुष’ और सख्त प्रशासक की बनाना चाहते थे, जबकि तोगड़िया अपने उग्र हिंदुत्व एजेंडे पर अड़े थे। यहीं से दोनों के रास्तों में ऐसी खाई आई जो आज तक नहीं भर पाई।
4. विवादों के ‘पोस्टर बॉय’ तोगड़िया का नाम अक्सर विवादों से जुड़ा रहा।
- त्रिशूल दीक्षा: उन्होंने देश भर में युवाओं को ‘त्रिशूल दीक्षा’ देने का अभियान चलाया, जिसे कई राज्यों में प्रतिबंधित किया गया।
- हेट स्पीच: उनके भड़काऊ बयानों के कारण उन पर देश भर में दर्जनों मुकदमे दर्ज हुए। वे हमेशा से भारत को संवैधानिक रूप से ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने के पक्षधर रहे हैं।
5. 2018 का ‘नाटकीय’ घटनाक्रम और VHP से विदाई साल 2018 तोगड़िया के लिए सबसे बुरा साल साबित हुआ।
- गायब होने का रहस्य: जनवरी 2018 में जेड-प्लस सुरक्षा होने के बावजूद तोगड़िया अचानक गायब हो गए। 12 घंटे बाद वे एक पार्क में बेहोशी की हालत में मिले। होश में आने के बाद उन्होंने रोते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरोप लगाया कि “मेरा एनकाउंटर करने की साजिश रची जा रही है।”
- संघ से छुट्टी: अप्रैल 2018 में VHP के इतिहास में पहली बार अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ। तोगड़िया गुट के राघव रेड्डी हार गए और वी.एस. कोकजे जीत गए। इसे तोगड़िया के वर्चस्व का अंत माना गया और उन्होंने VHP छोड़ दी।
6. अब क्या कर रहे हैं तोगड़िया? (वर्तमान स्थिति) VHP से निकलने के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और ‘अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद’ (AHP) का गठन किया।
- नया नारा: उन्होंने नारा दिया- “अबकी बार, हिंदू सरकार”।
- वर्तमान एजेंडा: आज वे काशी-मथुरा की मुक्ति, सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून, मंदिरों की सरकारी नियंत्रण से मुक्ति और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने की मांग को लेकर देश भर में भ्रमण कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने अपने पुराने दोस्त पीएम मोदी के प्रति कुछ नरम रुख भी दिखाया है, लेकिन वैचारिक रूप से वे अब भी अपनी शर्तों पर अड़े हैं।

