संचार साथी पोर्टल: क्या सरकार कर रही है आपके फोन की जासूसी? जानें खोये मोबाइल को ब्लॉक करने और फर्जी सिम पहचानने का सच

संचार साथी पोर्टल (Sanchar Saathi) क्या है? क्या इससे सरकार जासूसी करती है? जानें खोये हुए फोन को ट्रैक करने और अपने नाम पर चल रहे फर्जी सिम को बंद करने की पूरी प्रक्रिया।

Live Sach Profle PhotoRavindar Nagar

नई दिल्ली: आज के दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा है, लेकिन यही फोन अगर खो जाए या इसका गलत इस्तेमाल हो, तो बड़ी मुसीबत बन सकता है। इसी समस्या से निपटने के लिए भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने ‘संचार साथी’ (Sanchar Saathi) पोर्टल लॉन्च किया है।

लेकिन, इसके लॉन्च होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे सुरक्षा का कवच मान रहे हैं, तो कुछ को डर है कि कहीं इसके जरिए सरकार नागरिकों की जासूसी (Surveillance) तो नहीं कर रही? आइए, इस पोर्टल की हर परत खोलते हैं और जानते हैं सच।

आखिर क्या है ‘संचार साथी’? (What is Sanchar Saathi)

‘संचार साथी’ (sancharsaathi.gov.in) एक एकीकृत सिटिजन-सेंट्रिक वेब पोर्टल है, जिसे दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लॉन्च किया था। इसका मुख्य उद्देश्य मोबाइल उपयोगकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करना और धोखाधड़ी (Fraud) को रोकना है। यह पोर्टल मुख्य रूप से तीन बड़े काम करता है:

  1. खोये/चोरी हुए फोन को ब्लॉक करना (CEIR): अगर आपका फोन चोरी हो जाए, तो आप इस पोर्टल के जरिए उसे ब्लॉक कर सकते हैं, ताकि चोर उसका इस्तेमाल न कर सके।
  2. फर्जी सिम का पता लगाना (TAFCOP): आप यह चेक कर सकते हैं कि आपके नाम/आधार कार्ड पर कितने सिम एक्टिव हैं। अगर कोई अनजान नंबर दिखता है, तो आप उसे बंद करवा सकते हैं।
  3. फ्रॉड रिपोर्टिंग (Chakshu): संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट करना।

बड़ा सवाल: क्या इससे सरकार जासूसी करती है?

सोशल मीडिया पर यह अफवाह है कि इस पोर्टल के जरिए सरकार आपके निजी डेटा, कॉल रिकॉर्डिंग या लोकेशन पर नजर रख रही है। यह सच नहीं है।

तथ्य (Fact Check):

  • उद्देश्य: संचार साथी का उद्देश्य ‘निगरानी’ (Surveillance) नहीं, बल्कि ‘सुरक्षा’ (Security) है।
  • डेटा एक्सेस: यह पोर्टल आपके फोन के अंदर के डेटा (जैसे फोटो, व्हाट्सएप चैट, कॉन्टैक्ट्स) को एक्सेस नहीं करता।
  • लोकेशन ट्रैकिंग: यह पोर्टल केवल IMEI नंबर (फोन की पहचान संख्या) के आधार पर काम करता है। लोकेशन ट्रेसिंग तभी की जाती है जब आप खुद फोन चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं, ताकि पुलिस उसे बरामद कर सके।
  • निष्कर्ष: यह टूल जासूसी के लिए नहीं, बल्कि मोबाइल चोरी और साइबर अपराध (जैसे जामताड़ा स्टाइल फ्रॉड) को रोकने के लिए बनाया गया है।

संचार साथी के प्रमुख फीचर्स और उनका उपयोग

1. CEIR (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर): अगर आपका मोबाइल खो गया है:

  • सबसे पहले पुलिस में FIR दर्ज कराएं।
  • फिर संचार साथी पोर्टल पर जाकर CEIR मॉड्यूल चुनें।
  • वहां FIR की कॉपी और अपनी आईडी अपलोड करें।
  • फोन ब्लॉक हो जाएगा। अब अगर चोर उसमें नया सिम भी डालेगा, तो वह फोन नहीं चलेगा और उसकी लोकेशन पुलिस को मिल जाएगी।

2. TAFCOP (टेलीकॉम एनालिटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट):

  • पोर्टल पर TAFCOP विकल्प चुनें।
  • अपना मोबाइल नंबर डालें और OTP वेरिफाई करें।
  • आपके नाम पर चल रहे सभी नंबरों की लिस्ट आ जाएगी।
  • जो नंबर आपका नहीं है, उसके आगे “Not My Number” पर क्लिक करें, सरकार उसे बंद कर देगी।

3. चक्षु (Chakshu): हाल ही में जुड़ा यह फीचर आपको संदिग्ध फ्रॉड कॉल (लॉटरी, बिजली बिल, सेक्सटॉर्शन) और व्हाट्सएप मैसेज की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है।

असर और आंकड़े सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस पोर्टल की मदद से अब तक लाखों चोरी हुए मोबाइल ब्लॉक किए जा चुके हैं और हजारों फर्जी सिम कार्ड्स (जो साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे थे) की पहचान कर उन्हें बंद किया गया है।

निष्कर्ष ‘संचार साथी’ डिजिटल इंडिया की दिशा में एक सशक्त कदम है। जासूसी के डर को दरकिनार कर, हर जागरूक नागरिक को इसका इस्तेमाल अपने नाम पर चल रहे फर्जी कनेक्शन्स को हटाने और मोबाइल सुरक्षा के लिए करना चाहिए।

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