‘मणिकर्णिका’ संगोष्ठी: नारी में इच्छा, ज्ञान, कर्तव्य शक्ति स्वाभाविक—रानी लक्ष्मीबाई के आदर्शों पर हुआ प्रबोधन

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जयपुर: सांगानेर स्थित एस.एस. जैन सुबोध महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय और संस्कृता महिला विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को “मणिकर्णिका—संगोष्ठी” का भव्य आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका तथा भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं से युवा पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित की गई। कार्यक्रम में शिक्षण और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


नारी की तीन शक्तियाँ: इच्छा, ज्ञान और कर्तव्य

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता, राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका वंदनीय मा. वी. शांता कुमारी ने “मणिकर्णिका” विषय पर सारगर्भित उद्बोधन दिया। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के जीवन से प्रेरणा लेते हुए कहा कि नारी में इच्छा शक्ति (Will), ज्ञान शक्ति (Knowledge) एवं कर्तव्य शक्ति (Duty)—ये तीनों शक्तियाँ स्वाभाविक रूप से विद्यमान हैं।

  • अनुशासन और मातृत्व: उन्होंने बताया कि रानी लक्ष्मीबाई में अनुशासन और मातृत्व का अद्वितीय समन्वय था, जो आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
  • निष्ठा का संदेश: शांता कुमारी ने शिक्षण, चिकित्सा तथा अध्ययन—सभी क्षेत्रों में निष्ठा और कर्तव्यपरायणता का संदेश दिया।

संस्कृता महिला विचार मंच की संयोजिका डॉ. शिप्रा पारीक ने संगोष्ठी की प्रस्तावना में नारी के ‘स्वबोध जागरण’ तथा समाज में उसकी मूलभूत भूमिका पर विचार व्यक्त किए।

शिक्षक संस्थान राष्ट्र की नींव तैयार करते हैं

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जयपुर ग्रेटर की पूर्व महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर ने छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्र की नींव तैयार करते हैं। उन्होंने छात्राओं को चरित्र निर्माण और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाने के संकल्प के लिए प्रेरित किया।

  • अन्य वक्ता: महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. यदु शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
  • सांस्कृतिक प्रस्तुति: महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा रानी लक्ष्मीबाई के शौर्य पर आधारित एक प्रभावशाली लघु नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसने सभा में उपस्थित प्रत्येक दर्शक को रानी के अदम्य साहस और बलिदान का सजीव अनुभव कराया।

विशिष्ट पदाधिकारियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति के कई वरिष्ठ पदाधिकारी विशिष्ट रूप से उपस्थित थे, जिनमें क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख डॉ. मंजु शर्मा, प्रांत सह-कार्यवाहिका सरोज प्रजापति, जयपुर विभाग सह-कार्यवाहिका डॉ. वंदना पांडेय, प्रान्त व्यवस्था प्रमुख नेहा पलनितकर और विभाग व्यवस्था प्रमुख कमांडर प्रियंका चौधरी शामिल थीं।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजना शर्मा और डॉ. दीक्षिता अजवानी ने अत्यंत संयमित एवं प्रभावी शैली में किया। अंत में, सांगानेर विभाग की कार्यवाहिका गीतांजलि पारीक ने आभार व्यक्त किया और समापन ‘वंदे मातरम्’ के गायन के साथ हुआ।

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