होली के त्योहार की तैयारियों के बीच आमजन और व्यापारियों के लिए एक बेहद चुभने वाली खबर सामने आई है। बीती रात सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने एलपीजी गैस की कीमतों का मासिक रिव्यू करने के बाद कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर इजाफा कर दिया है। आज, 1 मार्च 2026 से लागू हुए इस फैसले के तहत कंपनियों ने सिलेंडर के दाम में 27.50 रुपये की बढ़ोतरी की है। यह इस साल का लगातार तीसरा महीना है जब तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला है, जिससे बाजार में हलवाई और रेस्टोरेंट संचालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
राजस्थान में ₹1796 के पार हुआ सिलेंडर, 3 महीनों का गणित
राजस्थान एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष दीपक गहलोत ने नई रेट लिस्ट की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में आज से 19 किलोग्राम वाला कॉमर्शियल गैस सिलेंडर अब 1769 रुपये के बजाय 1796.50 रुपये में उपलब्ध होगा। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले तीन महीनों में ही इन कीमतों ने लंबी छलांग लगाई है। साल की शुरुआत यानी जनवरी में कंपनियों ने प्रति सिलेंडर 111 रुपये बढ़ाए थे, जिसके बाद फरवरी में 49.50 रुपये की और बढ़ोतरी की गई थी। इस प्रकार, मात्र तीन महीनों के भीतर ही कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कुल 188 रुपये का भारी उछाल दर्ज किया जा चुका है।
घरेलू रसोई गैस के दाम स्थिर, मध्यम वर्ग को मिली मामूली राहत
कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में लगी इस आग के बीच घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एक अच्छी खबर यह है कि घरेलू उपयोग के सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रसोई में इस्तेमाल होने वाला 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर वर्तमान में 856.50 रुपये की पुरानी कीमत पर ही मिलता रहेगा, जिससे आम घरों के बजट पर फिलहाल कोई नया बोझ नहीं पड़ेगा। इसके साथ ही, राज्य सरकार की योजना के अनुसार बीपीएल और उज्ज्वला गैस कनेक्शनधारकों को मिलने वाले रियायती सिलेंडर की व्यवस्था भी पूर्ववत जारी रहेगी, जो एक बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है।
बाहर खाना और मिठाइयां खरीदना हो सकता है महंगा
होली के सीजन में कॉमर्शियल गैस के महंगे होने का सीधा असर अब आम आदमी की जेब पर पड़ने की आशंका है। चूंकि रेस्टोरेंट, ढाबों और हलवाइयों के यहाँ इसी गैस का इस्तेमाल होता है, ऐसे में त्योहार पर मिलने वाली मिठाइयों और बाहर के खाने की कीमतों में उछाल आना तय माना जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि लागत बढ़ने के कारण वे मजबूरी में कीमतें बढ़ा सकते हैं, जिससे होली के जश्न का मजा थोड़ा फीका पड़ सकता है।
