जयपुर | राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ‘समाधान आधारित राजनीति’ के तहत शुरू किया गया ‘रास्ता खोलो अभियान’ ग्रामीण अंचलों के लिए जीवनरेखा साबित हो रहा है। जयपुर जिला प्रशासन ने इस अभियान के तहत पिछले 15 महीनों (15 नवंबर 2024 से 21 फरवरी 2026) के भीतर रिकॉर्ड 1,703 बंद रास्तों को खुलवाने में सफलता हासिल की है।
फागी और मौजमाबाद ने पेश की मिसाल
जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशन में संचालित इस अभियान में फागी तहसील ने पूरे जिले में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। यहाँ प्रशासन ने आपसी समझाइश और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सर्वाधिक 148 रास्ते बहाल किए हैं।
तहसीलवार रास्तों का विवरण:
| तहसील | खुले गए रास्तों की संख्या | तहसील | खुले गए रास्तों की संख्या |
| फागी | 148 | मौजमाबाद | 132 |
| आंधी | 119 | चौमूं | 103 |
| शाहपुरा | 100 | फुलेरा / चाकसू | 91 – 91 |
| जमवारामगढ़ | 90 | आमेर / दूदू | 89 – 89 |
| रामपुरा डाबड़ी | 85 | माधोराजपुरा | 83 |
| बस्सी | 81 | जोबनेर | 79 |
(नोट: अन्य तहसीलों जैसे किशनगढ़, कोटखावदा और सांगानेर में भी अभियान के तहत दर्जनों रास्ते खोले गए हैं।)
ग्रामीणों और किसानों को सीधा लाभ
इन वर्षों पुराने विवादित रास्तों के खुलने से ग्रामीण जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव आए हैं:
- कृषि में सुगमता: किसानों को अब अपने खेतों तक मशीनरी ले जाने और तैयार उपज को मंडी तक पहुँचाने में आसानी हो रही है।
- स्वास्थ्य सेवाएँ: बंद रास्ते खुलने से गांवों तक एम्बुलेंस और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच तेज हुई है।
- शिक्षा की राह: विद्यार्थियों को अब स्कूल और कॉलेज जाने के लिए लंबे और उबड़-खाबड़ रास्तों का चक्कर नहीं लगाना पड़ता।
- सामाजिक सौहार्द: वर्षों पुराने जमीनी विवादों का समझाइश से समाधान होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी भाईचारा और विश्वास बढ़ा है।
सुशासन का नया अध्याय
मुख्यमंत्री की प्रेरणा से चलाया जा रहा यह अभियान न केवल भौतिक रास्तों को खोल रहा है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच की दूरियों को भी कम कर रहा है। जयपुर जिला प्रशासन का यह समाधान-आधारित दृष्टिकोण आज प्रदेश में सुशासन का पर्याय बन चुका है।
