Magh Mela 2020

Magh Mela 2020: घना कोहरा, ठंडी हवा, गुलाबी सर्दी, और मां गंगा। ये प्रयागराज है, संगम की नगरी प्रयागराज। जहां साधू संतों का डेरा है। ज्ञान का भंडार है। आस्था का सैलाब है और भक्ति की शक्ति है। यहां चिड़ियां ब्रह्म मुहूर्त में ही चहचहाने लगती हैं। सूरज को उगने की जल्दी रहती है। औऱ भोर होते ही घाटों पर असंख्य लोगों का ज्वार उमड़ने लगता है। गंगा जमुना और सरस्वती…… इन तीन नदियों के संगम को खुद में समेटने के लिए सूरज हर रोज अपनी बाहें पसारता है। ये प्रयागरारज है जहां हर साल माघ महीने में छोटे-छोटे तंबू लग जाते हैं। और इन तंबुओं में बस जाता है संपूर्ण भारत……. अगर भारत को करीब से जनाना, इसके रहस्य में खोना है और खुद में उतरना है तो त्रिवेणी संगम के शहर प्रयागराज की यात्रा करिए।
संस्कृति कला, साहित्य से परिपूर्ण भारत.. यहां आपको देश के हर राज्य की संस्कृति वहां की सभ्यता तो मिलेगी ही… साथ ही आप रूबरू होंगे विदेशों की संस्कृति से…  गंगा जमुना और सरस्वती के इस त्रिवेणी संगम को दखने कि लिए….. विदेशी सैलानी भी माघ महीने में गंगा के घाटों का अनुसरण करते हैं। एक ऐसा भव्य मेला जो आपके भारत को विश्व के मानचित्र पर एक अलग पहचान दिलाता है। मंत्र, शंख, घंटो की ध्वनि जहां हर समय गूंजती रहती है। वेद और शास्त्र भी खुद इस माघ के महीने में यहां आकर बस जाते हैं। इस पवित्र जल में स्नान करने के लिए…. खुद को धन्य बनाने के लिए।
भारत में हर साल असंख्य मेले लगते हैं। जो दर्शाते हैं संस्कृति को, वहां की मिट्टी को जलवायु को और लोक कलाकारों को… लेकिन प्रयागरराज में लगने वाला माघ मेला… दर्शाता है भारत को…. देश की विविधताओं को.. अखंडता और एकता को। ये माघ मेला साल भर तक लगने वाले मेलों में सबसे खास है। बदलते साल के साथ ही नए साल का जोश और मकर संक्रांति पर गंगा में डुबकी… ये संगम है इलाहबाद का…
इस साल भी 10 जनवरी से माघ मेला शुरू हो रहा है। इसके साथ ही शुरू हो रहा है लोगों का जमावड़ा… कड़ाके की ठंड ने भले ही लोगों के जीवन पर ब्रेक लगाई हो लेकिन गंगा के घाटों पर आपको हर रोज जीवन को बदलने की कहानी मिलेगी। उगते सूरज के साथ उठना और फिर संगम में डुबकी लगाना। हर हर गंगे और हर हर महादेव…. ये वे उद्घोष हैं जिसके साथ ही गंगा के इन घाटों पर नित नई एक कहानी लिखी जाती है।.. कभी संतो की, कभी आस्था की और कभी मां गंगा पर लोगों के अकाट्य विश्वास की। और ये विश्वास आपको दिखाई देगा घाटों पर पूजा पाठ कर रहे लोगों में…. दिन रात यहीं बैठना उपासना करना और मां गंगा में ही खो जाना… 1 महीने के लिए सत्य अहिंसा और ब्रह्मचर्य के मार्ग को अपनाना… जो आपको सीधे मोक्ष की प्राप्ति दिलाता है। ये कल्पवास कहलाता है। जहां आपको इन घाटों पर ही सोना है…. दिन रात मां गंगा की आराधना करनी है। और एक समय भोजन और दूसरे पहर निराहार रहना है। ऐसा माना जाता है कि प्रयाग में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ शुरू होने वाले एक मास के कल्पवास से एक कल्प यानि कि ब्रह्मा जी के एक दिन का पुण्य मिलता है। बदलते समय ने लोगों के परिवेश को भले ही बदला हो लेकिन कल्पवास करने वालों की संख्या में कभी कोई कमी नहीं आई है।
ब्रह्म देव यहां किया था यज्ञ
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ये कहा जाता है कि ब्रह्म देव ने सृष्टि की रचना के लिए सबसे पहले यहां यत्र किया था। ब्रह्म देव ने ये यज्ञ गंगा के किनार बसे शहरों में किया था। जिसमें से सबसे ज्यादा मान्यता प्रयागराज की ही। और कहा ये जाता है कि इस महीने में गंगा में डुबकी लगाने से जो पुण्य मिलता है.. वो अन्य किसी कर्म से नहीं मिलता। पौष महीने की ग्यारस से शुरू हुए मेले में 6 शाही स्नान होते हैं। जिसमे सबसे पहला है पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, वसंत पंचमी, माघ पूर्णमा और महाशिव रात्रि। शिवरात्रि को अंतिम शाही स्नान होता है उसके साथ ही माघ मेले का समापन। कहा जाता है कि माघ के महीने में देवता भी जमीन पर अवतरित होते हैं। और त्रिवेणी संगम में शाही स्नान का आनंद लेते हैं। 


2 thoughts on “Magh Mela 2020 : जप-तप, स्नान, ध्यान, दान और पुण्य का विशेष – Rakhi Singhal”

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