Story By Aditi Sharma : रिश्ते वो शब्द है जिसके ईर्द गिर्द ही हमारी पूरी जिंदगी घूमती है. परिवार से हमारा रिश्ता, हर एक परिवार के सदस्य से हमारा रिश्ता, दोस्तों से अपना रिश्ता, जीवनसाथी से हमारा रिश्ता,,यहां तक की पैसों से लगाव भी एक तरह का रिश्ता ही है.

जब बात रिश्तों की आती है तो जिंदगी के खुशी गम इस शब्द तक ही रहते हैं. रिश्तों से ही हमारी खुशी है…एक तरह से रिश्तें ही हमारे जीने की वजह होते हैं . लिहाजा जब कोई रिश्ता टूट जाता है तो उसका गम भी किसी बड़े सदमें से कम नहीं होता. चाहे वो रिश्ता कोई भी हो. जब परिवार से दूर होते हैं..अपनों से दूर होतें है. किसी करीबी मित्र से दूर होते हैं..तो उस दूरी का दर्द हमें न जाने कब तक दुखी करता है. एक दर्द, रातों की बैचेनी और यादें…जो आंखों से बरस कर बाहर तो निकल जाती है. मगर उसको खोने की उसके दूर होने की कमी नहीं भर पाती.

आगे बढ़ने का नाम जिंदगी

कहते हैं वक्त हर मर्ज का मरहम बन जाता है. जो चला गया उसकी कमी तो नहीं दूर हो सकती. लेकिन उसकी भरपाई तो की जा सकती है. हां की जा सकती है भरपाई. मौत के अलावा जब कुछ सही हो सकता है. अगर कोई करीबी दूर चला गया और उसके लौटने की उम्मीद नहीं तो किसी न किसी तरह से वक्त दोहराएगा और किसी भी तरह से आप उसकी भरपाई कर पाएंगे…वक्त के साथ उसकी यादें धुंधली और खुद को कहीं और ढालने की भी आदत आपको हो ही जाएगी…अगर अपने हमेशा के लिए आपसे दूर चले गए…तो इस बात को मानिए कि मौत को कोई नहीं रोक सकता. एक दिन हमें अलग होना ही है. ऐसे में आप खुद को व्यस्त रख सकते हैं. जरूरतमंदो की मदद कर सकते हैं…बच्चों से प्यार करें. उनकी बेफीक्री में ही आनंद ले…यकीन मानिएं ये एक बेहतर तरीका है. टूटे और खोए रिश्तों की यादों से उबरने का इसी का नाम जिंदगी है.

Leave a Reply

Your email address will not be published.