Hindi Poem for Father

बाप बेटी का अनमोल रिश्ता

बेटी को कहते है माँ की परछाई पर क्या ये उचित है मेरे भाई, हाँ माना कि माँ होती है बेटी की सुख दुःख की सहेली
पर पिता ने भी है उसके सुख दुःख की हर कसोटी झेली
दिखलाता नहीं चेहरे पर एक भी शिकं पर अंदर ही अंदर होती है उसको बेटी के दुख की चुभन।।
बेटी अगर हस्ती है तो पिता भी खिल उठता है
मानो दुनिया की सारी खुशियों का आनंद सिर्फ उसको ही मिलता है।।
धूप में छाया बनके साथ चले , बारिश में खुद साया बनके ओट करे
कौन कहता है कि पिता बस कमाके पालन पोषण का ही है काम करे
मैं कहती हूँ कि माँ की तरह वोह भी अपनी बेटी की परवाह करे।।
मेरे और मेरे पिता का रिश्ता है बड़ा अनमोल
करते हैं प्यार मुझे बिना किसी नाप तोल।।
भले ही कुछ ना हो जेब मे जब अपनी जेब टिटोली
पर मेरी ख्वाहिशे नही किसी मजबूरी से उसने तोली
हर पिता का सपना होता है की उससे उपर जाए उसकी औलाद
पर मेरे पापा का सपना है कि पूरी दुनिया करे मुझे सलाम।।
है दुआ मेरी उस ईश्वर से,
करदे पूरी मेरे पिता की अरदास
अगर मैं एक जरिया हूँ तो लगादे मेरी नैया पार
माता पिता का कर्ज़ तो कभी नहीं उतारा जा सकता
पर उनके सपनो को पुरा करके उनकी जिम्मेदारियों को तो है बाँटा जा सकता।।
बन जाऊँ मैं इस लायक की करू उनके हर सपने पूरे ताकि बरकरार रहे हम दोनों का यह अनमोल रिश्ता।।

Written by Tripti Dhaka

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