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रामायण काल का ‘सुपरफूड’: क्या है ‘कंदमूल’ जिसके सहारे भगवान राम ने जंगल में बिताए थे 14 साल? जानिए इसके औषधीय गुण

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(लाइव सच हेल्थ डेस्क): भारतीय धर्मग्रंथों, विशेषकर रामायण में अक्सर ‘कंदमूल’ का जिक्र आता है। हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने कंदमूल खाकर ही अपना जीवन यापन किया था। लेकिन आज की आधुनिक पीढ़ी अक्सर यह सवाल पूछती है कि आखिर यह ‘कंदमूल’ (Kandmool) है क्या? क्या यह कोई फल है या सब्जी? और आज के दौर में इसका क्या महत्व है?

आइये, इस प्राचीन और रहस्यमयी खाद्य पदार्थ के बारे में विस्तार से जानते हैं।

क्या है कंदमूल? (What is Kandmool) कंदमूल कोई एक विशिष्ट फल नहीं, बल्कि यह जमीन के नीचे उगने वाली जड़ों की एक श्रेणी है। हिंदी में ‘कंद’ का अर्थ होता है जड़ और ‘मूल’ का अर्थ भी जड़ या आधार होता है। सरल भाषा में कहें तो ऐसे पौधे जिनकी जड़ें गूदेदार होती हैं और जिन्हें खाया जा सकता है, उन्हें कंदमूल कहा जाता है।

दिखने में यह काफी हद तक शकरकंद (Sweet Potato) जैसा होता है, लेकिन आकार में यह उससे काफी बड़ा और सख्त हो सकता है। अंग्रेजी में इसे ‘रूट वेजिटेबल्स’ (Root Vegetables) की श्रेणी में रखा जाता है। इसका बाहरी आवरण अक्सर भूरा और मटमैला होता है, जबकि अंदर से यह सफेद या हल्का पीला होता है।

आदिमानव से लेकर आदिवासियों तक का मुख्य भोजन इतिहास गवाह है कि जब खेती (Agriculture) का आविष्कार नहीं हुआ था, तब प्राचीन समय में आदिमानव जंगलों में कंदमूल खाकर ही अपना गुजारा करते थे। इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि यह घने जंगलों में बड़ी आसानी से उपलब्ध हो जाता था।

आज भी भारत के कई आदिवासी क्षेत्रों में कंदमूल भोजन का एक मुख्य हिस्सा है। आदिवासी समाज इसे जंगल से खोदकर निकालते हैं। इसे पकाने की विधि बेहद सरल है—इन्हें उबालकर (Boiled) भी खाया जा सकता है और आग में भूनकर (Roasted) भी। इसका स्वाद सौंधा और हल्का मीठा होता है, जो भूख मिटाने के साथ-साथ तुरंत ऊर्जा भी देता है।

भगवान राम और कंदमूल का संबंध धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिला, तो उन्होंने राजसी भोजन का त्याग कर दिया था। जंगलों में भटकते हुए उन्होंने इसी कंदमूल को अपने आहार का मुख्य भाग बनाया। यह फल न केवल भूख शांत करता था, बल्कि जंगल की कठिन परिस्थितियों में शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करता था। यही कारण है कि इसे पवित्र और सात्विक भोजन माना जाता है।

पोषक तत्वों का खजाना (Nutritional Powerhouse) कंदमूल केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि यह औषधीय गुणों से भरपूर एक ‘सुपरफूड’ है।

  • कार्बोहाइड्रेट का स्रोत: इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) देता है।
  • विटामिन सी: कंदमूल विटामिन सी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाता है।
  • आंखों के लिए फायदेमंद: इसमें ‘कैरेटीन’ (Carotene) पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
  • हड्डियों की मजबूती: कंदमूल में कैल्शियम की भी काफी मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में सहायक है।

निष्कर्ष कंदमूल हमारी प्राचीन खाद्य संस्कृति का एक अहम हिस्सा है। यह हमें प्रकृति के करीब ले जाता है और बताता है कि कैसे हमारे पूर्वज जंगल में रहकर भी स्वस्थ और बलवान रहते थे। अगली बार जब आप कंदमूल शब्द सुनें, तो याद रखें कि यह केवल एक जड़ नहीं, बल्कि ऊर्जा और इतिहास का एक अद्भुत स्रोत है।

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