Central Railway Alert: मुंबई डिवीजन के 72 मेल लोको पायलट्स का सामूहिक VRS आवेदन, खराब खाने और काम के दबाव का लगाया आरोप

मुंबई (CSMT): मध्य रेलवे के मुंबई डिवीजन में एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। 16 फरवरी 2026 को करीब 72 मेल लोको पायलट (Loco Pilot Mail) ने एक संयुक्त आवेदन जमा कर सामूहिक रूप से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की मांग की है। विभागीय रेलवे प्रबंधक (DRM) को संबोधित इस आवेदन में कर्मचारियों ने काम के दमघोंटू माहौल, खराब सुविधाओं और बढ़ते प्रशासनिक दबाव को अपनी इस मजबूरी का मुख्य कारण बताया है।

इस्तीफे की 5 प्रमुख वजहें (Key Grievances)

दस्तावेजों के अनुसार, वर्षों की समर्पित सेवा के बावजूद, इन कर्मचारियों ने निम्नलिखित समस्याओं के चलते यह कठोर निर्णय लिया है:

  • घटिया और अस्वास्थ्यकर भोजन: ड्यूटी के दौरान और रनिंग रूम (विश्राम गृहों) में मिलने वाला खाना निम्न स्तर का और अस्वास्थ्यकर होता है, जो सेहत के लिए खतरा बन गया है।
  • रनिंग रूम की बदहाली: आराम करने की सुविधाओं में बुनियादी साफ-सफाई और आवश्यक सुविधाओं का अभाव है, जिससे कठिन ड्यूटी के बाद रिकवरी मुमकिन नहीं हो पाती।
  • असुरक्षित बुनियादी ढांचा: लॉबी, ट्रिप शेड और रनिंग रूम तक पहुँचने के लिए उचित रास्ते और रोशनी की कमी है, जो विशेष रूप से रात के समय गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करती है।
  • अत्यधिक प्रशासनिक दबाव: अनावश्यक हस्तक्षेप, बेवजह की काउंसलिंग, चेतावनी पत्र और ड्यूटी से पहले या बाद में लंबे समय तक रोके रखने (detention) जैसे कारणों से काम का माहौल तनावपूर्ण और मनोबल गिराने वाला हो गया है।
  • स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर असर: लगातार तनाव और अनियमित ड्यूटी के कारण कर्मचारियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके पारिवारिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

अधिकारियों की चुप्पी और बढ़ता तनाव

आवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि इन समस्याओं को कई बार लिखित और मौखिक रूप से अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया, लेकिन कोई प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। कर्मचारियों का तर्क है कि ऐसे हालातों में सेवा जारी रखना ‘पेशेवर रूप से टिकाऊ नहीं’ (Professionally Unsustainable) रह गया है।

रेल संचालन पर पड़ सकता है असर

मुंबई डिवीजन में मेल ट्रेनों के लिए लगभग 240 लोको पायलट कार्यरत हैं, जिनमें से 72 का एक साथ इस्तीफा देना (जो कि कुल संख्या का करीब 30% है) भविष्य में रेल सेवाओं की निरंतरता और सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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