यह समझौता भारत में निवेश करने वाली अमेरिकी रक्षा कंपनियों के हितों की रक्षा करने की गारंटी देता है।
भारतीय उद्योग रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में अधिक निवेश किये जाने की आवश्यकता है, इसलिये ISA भारत के लिये विशेष रूप से आवश्यक है।
यह समझौता अमेरिकी सरकार और अमेरिकी कंपनियों को भारतीय निजी क्षेत्र के साथ गोपनीय जानकारी साझा करने की अनुमति देता है, जो अब तक भारत सरकार और रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों तक सीमित है।

भारत और अमेरिकी रक्षा साझेदारी ते तौर पर साल 2019 में भारतीय सेना ने अमेरिकी कंपनी बोइंग के चिनूक और अपाचे लडाकू हेलीकॉप्टर को अपने बेड़े में शामिल किया है। इसके साथ ही भारत अमेरिका के फॉरन मिलिटरी सेल्स प्रोग्राम के तहत भारत अगले कुछ सालों में करीब 10 अरब डॉलर के रक्षा सौदे को अंतिम रूप देने की तैयारी में है।

इसके तहत मेरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट पी-8 आई 2.6 अरब डॉलर के 24 नेवल मल्टीरोल एमएच-60 ‘रोमियो’ हेलिकॉप्टर्स और लगभग 1 अरब डॉलर का दिल्ली के ऊपर मिसाइल शील्ड के लिए नैशनल अडवांस्ड सर्फेस टू एयर मिसाइल सिस्टम-2 शामिल है।

साल 2007 से भारत अमेरिका के साथ करीब 17 अरब डॉलर के रक्षा सौदे कर चुका है और इसके साथ ही दोनों देशों ने कई मोर्चों पर अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार किया है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एतिहासिक भारत दौरा भारत और अमेरिका के रक्षा संबंधों में एक नई इबारत लिखेगा

Source : DD News

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