अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से अब तक का सबसे बड़ा कानूनी झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रपति के पास आयात शुल्क (Tariff) लगाने का असीमित अधिकार नहीं है। कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा पड़ोसी देशों और चीन पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ के फैसले को “असंवैधानिक” और “अधिकार क्षेत्र से बाहर” बताते हुए उस पर रोक लगा दी है।
क्या है पूरा मामला?
राष्ट्रपति पद संभालते ही डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत मैक्सिको और कनाडा से आने वाले सामानों पर 25% और चीन के सामानों पर अतिरिक्त 10% टैरिफ लगाने का आदेश जारी किया था। ट्रम्प ने इसके लिए ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का हवाला दिया था, जिसे लेकर कई व्यापारिक समूहों और राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि “संविधान के तहत वाणिज्य (Commerce) को विनियमित करने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस (संसद) के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास।” कोर्ट ने माना कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बिना ठोस आधार के इतने बड़े पैमाने पर आर्थिक प्रतिबंध या टैरिफ लगाना कार्यपालिका की शक्तियों का दुरुपयोग है। इस फैसले का मतलब है कि अब ट्रम्प प्रशासन को कोई भी नया टैरिफ लगाने से पहले कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी।
वैश्विक बाजारों और पड़ोसी देशों को राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली है। मैक्सिको और कनाडा, जो अमेरिका के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, के लिए यह फैसला किसी संजीवनी से कम नहीं है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि ये टैरिफ लागू रहते, तो अमेरिका में महंगाई आसमान छू सकती थी और वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो जाती।
ट्रम्प के लिए बड़ा सियासी झटका
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक झटका है। ट्रम्प ने अपनी चुनावी रैलियों में वादा किया था कि वे विदेशी सामानों पर टैक्स लगाकर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देंगे। लेकिन कोर्ट के इस आदेश ने उनके हाथ बांध दिए हैं। अब देखना होगा कि ट्रम्प प्रशासन इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या वे कांग्रेस के जरिए इसे पास कराने की कोशिश करेंगे।
